domingo, 8 de junho de 2025

भजन संहिता 65 दाऊद परमेश्वर की स्तुति करता है और उसे मिले आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देता है

 भजन संहिता 65

दाऊद परमेश्वर की स्तुति करता है और उसे मिले आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देता है


1 हे परमेश्वर, सिय्योन में तेरी स्तुति होती है; तेरी मन्नत पूरी होगी।

2 हे प्रार्थना सुननेवाले, सब प्राणी तेरे पास आएंगे।

3 अधर्म मुझ पर हावी हो गया; परन्तु तू हमारे अपराधों को क्षमा करता है।

4 धन्य है वह जिसे तू चुनता है, और अपने निकट लाता है, कि वह तेरे आंगनों में वास करे; हम तेरे भवन, तेरे पवित्र मन्दिर की भलाई से तृप्त होंगे।

5 हे हमारे उद्धार करनेवाले परमेश्वर, तू हमें भयानक न्याय से उत्तर देगा; तू पृथ्वी के दूर दूर देशों और समुद्र के पार रहनेवालों की आशा है;

6 जो अपनी सामर्थ्य से पहाड़ों को स्थिर करता है, और उन्हें सामर्थ्य से कसता है;

7 जो समुद्र के गरजने, उनकी लहरों के शोर और लोगों के कोलाहल को शांत करता है।

 8 पृथ्वी के दूर दूर देशों के रहनेवाले तेरे चिन्हों से डरते हैं; तू सुबह और शाम के समय को आनन्दमय बनाता है।

9 तू धरती की देखभाल करता है और उसे सींचता है; तू उसे परमेश्वर की नदी से भरपूर करता है, जो जल से भरपूर है; तू उसे तैयार करके अनाज देता है।

10 तू उसकी नालियों को सींचता है, और उसकी ऊँचाई को नियंत्रित करता है; तू उसे भरपूर वर्षा से नरम करता है; तू उसकी वृद्धि को आशीर्वाद देता है।

11 तू अपनी भलाई से वर्ष का मुकुट सजाता है, और तेरे मार्गों से उपजाऊपन गिरता है।

12 वे जंगल की चरागाहों पर गिरते हैं, और पहाड़ियाँ आनन्द से बंधी हुई हैं।

13 खेत भेड़-बकरियों से भर गए हैं, और तराईयाँ अनाज से लदी हुई हैं; इसलिए वे आनन्दित और गाते हैं।

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