terça-feira, 1 de abril de 2025

द्वितीय इतिहास 32 हिजकिय्याह की बीमारी और मृत्यु

 द्वितीय इतिहास 32

हिजकिय्याह की बीमारी और मृत्यु

24 उन दिनों में हिजकिय्याह अत्यन्त बीमार हो गया; और उस ने यहोवा से प्रार्थना की, और उस ने उस से बातें करके उसे एक चिन्ह दिया।

25 परन्तु हिजकिय्याह ने उस लाभ के प्रति कुछ न कहा जो उसे दिया गया था; क्योंकि उसका मन फूल उठा; तब उस पर और यहूदा और यरूशलेम पर बड़ा क्रोध भड़का।

26 परन्तु हिजकिय्याह ने यरूशलेम के निवासियोंसमेत अपने मन के घमण्ड के कारण अपने आप को नम्र कर लिया; और हिजकिय्याह के दिनों में यहोवा का क्रोध उन पर न भड़का।

27 और हिजकिय्याह के पास बहुत धन और वैभव हो गया; और उस ने चान्दी, सोना, बहुमोल रत्न, सुगन्धद्रव्य, ढालें, और जो कुछ चाहा जा सकता था, उसका भण्डार बना लिया।

28 और गेहूं, और नये दाखमधु, और तेल की उपज के लिये भण्डारगृह; और सब प्रकार के पशुओं के लिथे अस्तबल, और भेड़-बकरियोंके लिथे बाड़े।

29 और उस ने नगर भी बसाए, और उसके पास भेड़-बकरियां और गाय-बैल बहुत हो गए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे बहुत सम्पत्ति दी थी।

30 और हिजकिय्याह ने गीहोन के जल के ऊपरी सोते को बन्द करके उसे दाऊदपुर की पच्छिम की ओर नीचे की ओर बहा दिया; क्योंकि हिजकिय्याह अपने सब कामों में सफल हुआ।

31 परन्तु बाबुल के हाकिमों के दूत जो उस देश में क्या काम हुए थे, उसका हाल जानने के लिये उसके पास भेजे गए थे, परन्तु परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया, कि उसे परखें, और उसके मन का सब कुछ जान लें।

32 हिजकिय्याह के और काम और उसकी भलाई का वर्णन आमोस के पुत्र यशायाह भविष्यद्वक्ता के दर्शन में, और यहूदा और इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है।

33 और हिजकिय्याह अपने पुरखाओं के संग सो गया, और उन्होंने उसे दाऊद की सन्तान की सबसे ऊंची कब्रों में मिट्टी दी; और उसके मरने पर सारे यहूदा और यरूशलेम के निवासियों ने उसका आदर किया; और उसका पुत्र मनश्शे उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

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