एज्रा 06
मंदिर बनकर तैयार हो गया है और उसे पवित्र कर दिया गया है
13 तब महानद के उस पार के अधिपति तत्नै, शतर्बोजनै और उनके साथियों ने राजा दारा की आज्ञा के अनुसार फुर्ती से वैसा ही किया।
14 और यहूदियों के पुरनियों ने हाग्गै नबी और इद्दो के पुत्र जकर्याह की भविष्यद्वाणी के द्वारा उसे बनाया और तरक्की की। और उन्होंने फारस के राजा कुस्रू, दारा और अर्तक्षत्र की आज्ञा के अनुसार भवन बनाकर पूरा कर दिया।
15 और यह भवन अदार महीने के तीसरे दिन बनकर तैयार हुआ, जो राजा दारा के राज्य का छठा वर्ष था।
16 और इस्राएलियों, याजकों, लेवियों और बन्धुआई से आए हुए शेष लोगों ने परमेश्वर के उस भवन की प्रतिष्ठा आनन्द के साथ की।
17 और उन्होंने परमेश्वर के उस भवन के अभिषेक के लिये इस्राएल के गोत्रों की गिनती के अनुसार, सारे इस्राएल के लिये एक सौ बैल, दो सौ मेढ़े, चार सौ भेड़ के बच्चे, और बारह बकरे पापबलि के लिये चढ़ाए।
18 और उन्होंने याजकों को उनके दल में, और लेवियों को उनके दल में नियुक्त किया, कि वे परमेश्वर की उस सेवा के लिये जो यरूशलेम में है, मूसा की पुस्तक के लिखे हुए के अनुसार करें।
19 और जो लोग बन्धुआई से छूटकर आए थे उन्होंने पहिले महीने के चौदहवें दिन को फसह मनाया।
20 क्योंकि याजकों और लेवियों ने एक मन होकर अपने को शुद्ध किया था, और सब के सब शुद्ध थे; और उन्होंने सब बन्धुओं, अपने भाई याजकों, और अपने लिये भी फसह का मेम्ना बलि किया।
21 तब इस्राएल के लोग जो बन्धुआई से लौट आए थे, उन्होंने और उन सभों ने जो उनके संग देश के लोगों की अशुद्धता से अलग होकर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की खोज करने को निकले थे, फसह का भोजन किया।
22 और उन्होंने अख़मीरी रोटी का पर्व सात दिन तक आनन्द से मनाया, क्योंकि यहोवा ने उन्हें आनन्दित किया था, और अश्शूर के राजा का मन उनकी ओर फेर दिया था, कि वह परमेश्वर अर्थात् इस्राएल के परमेश्वर के भवन के काम में उन्हें दृढ़ करे।
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