sexta-feira, 26 de setembro de 2025

भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 18 अश्शूरियों के विनाश की घोषणा इथियोपिया में की गई है

 भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 18

अश्शूरियों के विनाश की घोषणा इथियोपिया में की गई है


1 उस देश पर हाय जो अपने पंखों से छाया करता है, जो इथियोपिया की नदियों के पार है!

2 जो समुद्र के रास्ते सरकंडे की नावों में दूतों को पानी पर यह कहते हुए भेजता है, "हे शीघ्र संदेशवाहको, उस ऊँचे और सुडौल राष्ट्र के पास जाओ, जो अपने आरंभ से ही भयानक है, उस राष्ट्र के पास जो नाप-तौल और लज्जा का पात्र है, जिसकी भूमि नदियों ने विभाजित कर दी है।"

3 हे जगत के सब निवासियों, और हे देश के निवासियों, जब पहाड़ों पर झंडा फहराया जाएगा, तो तुम उसे देखोगे; जब तुरही फूँकी जाएगी, तो तुम उसे सुनोगे।

4 क्योंकि यहोवा ने मुझसे यों कहा है: मैं शान्त होकर अपने निवास से देखता रहूँगा, जैसे कटनी के समय ओस का बादल। 

5 क्योंकि कटनी से पहले, जब अंकुर भर जाएँगे और खट्टे अंगूर पक जाएँगे, तो वह डालियों को छाँटेगा और टहनियों को तोड़कर अलग कर देगा।

6 वे पहाड़ों के पक्षियों और जंगली जानवरों के लिए छोड़ दिए जाएँगे; शिकारी पक्षी उन पर गर्मी का मौसम बिताएँगे, और सभी जंगली जानवर उन पर सर्दी बिताएँगे।

7 उस समय वह सेनाओं के यहोवा के पास एक लंबी और चमकदार जाति को लाएगा, जो अपने आरंभ से ही भयानक लोग हैं, उपायों और अत्याचार का एक राष्ट्र, जिसकी भूमि नदियों से विभाजित है, सेनाओं के यहोवा के नाम के स्थान पर, सिय्योन पर्वत तक।

Nenhum comentário:

Postar um comentário