भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 14
पलिश्तियों के विरुद्ध भविष्यवाणी
28 जिस वर्ष राजा आहाज मरा, उसी वर्ष यह विपत्ति आई।
29 हे सारे पलिश्तियों, आनन्द मत करो, क्योंकि जिस लाठी ने तुम्हें मारा था वह टूट गई है। क्योंकि साँप की जड़ से एक तुलसीपत्र निकलेगा, और उसका बच्चा एक अग्निमय, उड़नेवाला साँप होगा।
30 कंगालों के जेठे चरेंगे, और दरिद्र निडर विश्राम करेंगे। परन्तु मैं तुम्हारी जड़ को अकाल से उजाड़ दूँगा, और तुम्हारे बचे हुए लोग नष्ट हो जाएँगे।
31 हे फाटक, हाय, करो; हे नगर, हे पलिश्तियों, चिल्लाओ, तुम सब पिघल गए हो! क्योंकि उत्तर दिशा से धुआँ उठ रहा है, और नियत समय पर कोई भी अकेला नहीं बचेगा।
32 तब तुम प्रजा के दूतों को क्या उत्तर दोगे? यहोवा ने सिय्योन की नींव डाली है, ताकि उसकी प्रजा के उत्पीड़ित लोग उसमें शरण पा सकें।
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