भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 17
अश्शूर की सेना के विनाश की भविष्यवाणी की गई है
12 उन विशाल राष्ट्रों की भीड़ पर हाय, जो समुद्र के गर्जन के समान गरजते हैं, और उन राष्ट्रों के गरजने पर हाय, जो प्रचंड जल के गरजने के समान गरजते हैं!
13 राष्ट्र अनेक जल के गरजने के समान गरजेंगे, परन्तु वह उन्हें डाँटेगा, और वे दूर भाग जाएँगे; वे पहाड़ों से भूसी की तरह हवा से, या बवंडर से गेंद की तरह उड़ा दिए जाएँगे।
14 शाम को भय छा जाता है, और भोर से पहले वे गायब हो जाते हैं। हमें लूटने वालों का यही भाग है, और हमें लूटने वालों का यही भाग्य है।
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