terça-feira, 23 de setembro de 2025

भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 12 अपने लोगों को पुनर्स्थापित करने के लिए परमेश्वर की स्तुति

 भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 12

अपने लोगों को पुनर्स्थापित करने के लिए परमेश्वर की स्तुति


1 और उस दिन तुम कहोगे, "हे यहोवा, मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, क्योंकि यद्यपि तू मुझ पर क्रोधित था, परन्तु अब तेरा क्रोध शान्त हो गया है, और तू ने मुझे शान्ति दी है।"

2 देखो, परमेश्वर मेरा उद्धार है; मैं भरोसा रखूँगा और न डरूँगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर मेरा बल और मेरा गीत है, और वही मेरा उद्धार बन गया है।

3 और तुम आनन्द से उद्धार के कुओं से जल भरोगे।

4 और उस दिन तुम कहोगे, "यहोवा का धन्यवाद करो; उसका नाम पुकारो; देश-देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो; घोषित करो कि उसका नाम महान है।"

5 यहोवा का गीत गाओ, क्योंकि उसने महान कार्य किए हैं; सारी पृथ्वी पर उनका प्रचार करो।

6 हे सिय्योन के रहनेवालो, जयजयकार करो और आनन्द से गाओ, क्योंकि इस्राएल का पवित्र तुम्हारे बीच महान है।

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