sábado, 2 de agosto de 2025

सुलैमान के नीतिवचन 22

 सुलैमान के नीतिवचन 22


1 अच्छा नाम बड़े धन से बढ़कर है, और अनुग्रह धन और सोने से उत्तम है।

2 धनी और निर्धन एक साथ मिले हैं; यहोवा ने उन सबको बनाया है।

3 बुद्धिमान मनुष्य विपत्ति को देखकर छिप जाता है, परन्तु भोले लोग बच निकलते हैं और दण्ड पाते हैं।

4 नम्रता और यहोवा के भय का प्रतिफल धन, सम्मान और जीवन है।

5 दुष्टों के मार्ग में काँटे और फन्दे होते हैं; जो अपने प्राणों की रक्षा करता है, वह उनसे दूर रहता है।

6 बच्चे को उसी मार्ग पर चलना सिखाओ जिस पर उसे चलना चाहिए, और वह बुढ़ापे में भी उससे न हटेगा।

7 धनी निर्धन पर शासन करता है, और उधार लेनेवाला उधार देनेवाले का दास होता है।

8 जो अधर्म बोता है, वह विपत्ति काटेगा, और उसके क्रोध की छड़ी टूट जाएगी।

9 जो अनुग्रहकारी है, वह धन्य होगा, क्योंकि उसने अपनी रोटी कंगालों को दी है। 10 ठट्ठा करनेवाले को निकाल दे, तब झगड़ा जाता रहेगा; झगड़ा और लज्जा का अन्त हो जाएगा।

11 जो मन की पवित्रता से प्रीति रखता है और जिसके वचन अनुग्रह से भरे हैं, राजा उसका मित्र होगा।

12 यहोवा ज्ञानी की रक्षा करता है, परन्तु दुष्टों की बातें उलट देता है।

13 आलसी कहता है, “बाहर सिंह खड़ा है; मैं सड़कों में मारा जाऊँगा।”

14 पराई स्त्रियों का मुँह गहिरा गड्ढा है; जिस किसी पर यहोवा क्रोधित होता है, वह उसमें गिर जाता है।

15 मूर्खता बालक के मन में बंधी रहती है, परन्तु ताड़ना की छड़ी उसे उससे दूर कर देती है।

16 जो अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए निर्धनों पर अत्याचार करता है, या जो धनवानों को दान देता है, वह निश्चय ही निर्धन हो जाएगा।

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