domingo, 3 de agosto de 2025

सुलैमान की नीतिवचन 25 सुलैमान की अन्य नीतिवचन, जो राजा हिजकिय्याह के दिनों में संकलित की गईं

 सुलैमान की नीतिवचन 25

सुलैमान की अन्य नीतिवचन, जो राजा हिजकिय्याह के दिनों में संकलित की गईं


1 ये भी सुलैमान की नीतिवचन हैं, जिन्हें यहूदा के राजा हिजकिय्याह के आदमियों ने नकल किया था।

2 परमेश्वर की महिमा किसी बात को छिपाना है, परन्तु राजाओं की महिमा सब कुछ खोज निकालने में है।

3 क्योंकि ऊपर आकाश और नीचे पृथ्वी, और राजाओं के हृदय, खोज से परे हैं।

4 चाँदी में से मैल निकाल दो, तब ताननेवाले के लिये एक पात्र निकलेगा।

5 दुष्टों को राजा के सामने से दूर करो, तब उसका सिंहासन धर्म में स्थिर होगा।

6 राजा के सामने घमंड मत करो, और न ही बड़े लोगों के स्थान पर खड़े होओ।

7 क्योंकि यह अच्छा है कि वे तुमसे कहें, 'यहाँ ऊपर आओ,' बजाय इसके कि तुम उस राजकुमार के सामने, जिसे तुमने अपनी आँखों से देखा है, नम्र हो जाओ। 

8 अपने तर्क में जल्दबाज़ी न करना, कहीं ऐसा न हो कि अन्त में तुम समझ ही न पाओ कि क्या करना है, और तुम्हारा पड़ोसी तुम्हें उलझा दे।

9 अपना मामला अपने पड़ोसी से ही लड़ो, और दूसरे का भेद न खोलो।

10 ऐसा न हो कि सुननेवाला तुम्हारा अपमान करे, और बदनामी तुमसे दूर न हो।

11 चाँदी की टोकरियों में सोने के सेबों के समान, उचित रीति से बोला हुआ वचन होता है।

12 सुननेवाले के लिए बुद्धिमानी भरी डाँट सोने की बालियों और शुद्ध सोने के आभूषणों के समान होती है।

13 कटनी के समय बर्फ की ठंडक के समान, विश्वासयोग्य दूत अपने भेजनेवालों के लिए होता है, क्योंकि वह अपने स्वामियों के मन को तृप्त करता है।

14 जो मनुष्य दान का झूठा घमण्ड करता है, वह बिना वर्षा के बादलों और वायु के समान है।

15 धीरज से हाकिम मनाया जाता है, और कोमल वाणी हड्डियों को तोड़ देती है। 

16 क्या तुम्हें शहद मिला है? अपने लिए पर्याप्त खा लो, कहीं ऐसा न हो कि तुम उससे भर जाओ और उसे उगल दो।

17 अपने पड़ोसी के घर से दूर रहो, कहीं ऐसा न हो कि वह तुमसे ऊबकर तुमसे घृणा करने लगे।

18 जो अपने पड़ोसी के विरुद्ध झूठी गवाही देता है, वह हथौड़ा, तलवार और तीखे तीर के समान है।

19 विपत्ति के समय विश्वासघाती का भरोसा टूटे हुए दाँत या मोच के समान है।

20 जो उदास मन से गीत गाता है, वह ठण्डे दिन में अपने कपड़े उतारनेवाले के समान है, और मधु पर सिरके के समान है।

21 यदि तेरा शत्रु भूखा हो, तो उसे रोटी खाने को दे; और यदि वह प्यासा हो, तो उसे पानी पिला।

22 क्योंकि तू उसके सिर पर जलते हुए अंगारों का ढेर लगाएगा, और यहोवा तुझे बदला देगा।

23 उत्तर की हवा वर्षा को दूर भगा देती है, और क्रोधी मुख चुगली करनेवाली वाणी को। 

24 बड़े घर में झगड़ालू स्त्री के साथ रहने से अटारी के कोने में रहना अच्छा है।

25 जैसे थके हुए मन के लिए दूर देश से शुभ समाचार ठंडा जल होता है।

26 धर्मी मनुष्य दुष्टों के आगे गिरता है, और वह व्याकुल सोते या भ्रष्ट सोते के समान है।

27 बहुत अधिक मधु खाना अच्छा नहीं है, और न ही अपनी बड़ाई की खोज करना अच्छा है।

28 जो मनुष्य अपनी आत्मा पर वश नहीं रखता, वह टूटे हुए और बिना शहरपनाह वाले नगर के समान है।

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