sábado, 5 de julho de 2025

भजन 129 चर्च को सताया जाता है, लेकिन नष्ट नहीं किया जाता

 भजन 129

चर्च को सताया जाता है, लेकिन नष्ट नहीं किया जाता


1 इस्राएल अब कहे, मेरी जवानी से ही उन्होंने मुझे बहुत बार सताया है।

2 मेरी जवानी से ही उन्होंने मुझे बहुत बार सताया है, फिर भी वे मुझ पर हावी नहीं हुए।

3 हल चलाने वालों ने मेरी पीठ पर हल चलाया है; उन्होंने अपनी खालें लंबी कर ली हैं।

4 यहोवा धर्मी है; उसने दुष्टों की रस्सियों को काट दिया है।

5 सिय्योन से नफरत करने वाले सभी लोग शर्मिंदा हों और पीछे हट जाएँ।

6 वे घर की छतों पर उगने वाली घास की तरह हों, जो काटी जाने से पहले ही सूख जाती है।

7 जिससे न तो काटनेवाला अपना हाथ भरता है, न पूले बाँधनेवाला अपनी बाँह भरता है।

8 और न ही आने-जानेवाले कहते हैं, "प्रभु का आशीर्वाद तुम पर हो!" हम प्रभु के नाम पर तुम्हें आशीर्वाद देंगे।

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