सुलैमान के नीतिवचन 3
1 हे मेरे पुत्र, मेरी व्यवस्था को मत भूलना, परन्तु अपने मन में मेरी आज्ञाओं को रखना।
2 क्योंकि ये तेरी आयु बढ़ाएँगी, और तेरे जीवन के वर्ष और शान्ति बढ़ेगी।
3 करुणा और सच्चाई को तू अलग न होने दे; इन्हें अपने गले का हार बना ले; इन्हें अपनी हृदयरूपी पटिया पर लिख ले।
4 तब तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह और उत्तम समझ पाएगा।
5 तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।
6 उसी को स्मरण करके अपने सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
7 अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना और बुराई से दूर रहना।
8 इससे तेरा पेट भरेगा, और तेरी हड्डियाँ पुष्ट होंगी।
9 अपनी संपत्ति से और अपनी सारी उपज के पहले फल से यहोवा का आदर करना;
10 तब तेरे खत्ते भरकर लबालब भर जाएँगे, और तेरे रसकुण्डों से नया दाखमधु फूट निकलेगा।
11 हे मेरे पुत्र, यहोवा की शिक्षा को तुच्छ न जानना, और न उसकी डाँट से घबराना।
12 क्योंकि यहोवा अपने प्रियों को ताड़ना करता है, जैसे कि पिता अपने प्रिय पुत्र को।
13 धन्य है वह मनुष्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुष्य जो समझ प्राप्त करे।
14 क्योंकि उसका व्यापार चाँदी के व्यापार से, और उसका लाभ शुद्ध सोने के व्यापार से उत्तम है।
15 वह माणिकों से भी अधिक अनमोल है; तेरी सारी अभिलाषाएँ उसके तुल्य नहीं हो सकतीं।
16 उसके दाहिने हाथ में दीर्घायु है; उसके बाएँ हाथ में धन और महिमा है।
17 उसके मार्ग मनभाऊ हैं, और उसके सब पथ कुशल के हैं।
18 जो उसको थामे रहते हैं, उनके लिये वह जीवन का वृक्ष है; और जो उसको थामे रहते हैं, वे सब धन्य हैं।
19 यहोवा ने पृथ्वी की नींव बुद्धि से डाली; और समझ से आकाश को तैयार किया।
20 उसके ज्ञान से गहिरे सागर फट गए, और बादल ओस गिराते हैं।
21 हे मेरे पुत्र, इन बातों को अपनी आँखों से ओझल न होने दे: खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर।
22 क्योंकि ये तेरे प्राण के लिए जीवन और तेरे गले के लिए शोभायमान होंगी।
23 तब तू अपने मार्ग पर निडर चलेगा, और तेरे पाँव में ठेस न लगेगी।
24 जब तू लेटेगा, तब तुझे भय न होगा; तू लेटेगा और तुझे सुखद नींद आएगी।
25 अचानक आनेवाले भय से न डर, न ही दुष्टों के विनाश से।
26 क्योंकि यहोवा तेरी आशा है, और वह तेरे पाँवों को फँसने से बचाएगा।
27 जब तेरे बस में हो, तो उसके मालिकों से भलाई करने से न रुकना।
28 जब वह तेरे पास हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना, 'जा, फिर आना, कल मैं तुझे दे दूँगा।'
29 अपने पड़ोसी के विरुद्ध बुरी योजना न बनाना, क्योंकि वह तेरे साथ सुरक्षित रहता है।
30 यदि किसी व्यक्ति ने तुझे कोई हानि नहीं पहुँचाई है, तो उसके साथ अकारण झगड़ा न करना।
31 हिंसक मनुष्य से ईर्ष्या न करना, न ही उसके किसी मार्ग पर चलना।
32 क्योंकि यहोवा दुष्टों से घृणा करता है, परन्तु उसका भेद सीधे लोगों पर है।
33 यहोवा का शाप दुष्टों के घर पर है, परन्तु वह धर्मियों के निवास पर आशीष देगा।
34 वह ठट्ठा करनेवालों का उपहास तो करेगा, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करेगा।
35 बुद्धिमान लोग सम्मान पाएँगे, परन्तु मूर्ख अपने ऊपर अपमान लाएँगे।
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