sábado, 26 de julho de 2025

सुलैमान के नीतिवचन 11

 सुलैमान के नीतिवचन 11


1 यहोवा को छल का तराजू घृणित है, परन्तु सच्चा बटखरा उसे भाता है।

2 जब अभिमान आता है, तब अपमान भी आता है, परन्तु नम्र लोगों के पास बुद्धि होती है।

3 धर्मी जन की खराई उन्हें मार्ग दिखाती है, परन्तु विश्वासघाती की कुटिलता उन्हें नाश कर देती है।

4 क्रोध के दिन धन से लाभ नहीं होता, परन्तु धर्म मृत्यु से बचाता है।

5 धर्मी जन का धर्म उनका मार्ग सीधा करता है, परन्तु दुष्ट अपनी दुष्टता के कारण गिर जाते हैं।

6 धर्मी जन का धर्म उन्हें बचाता है, परन्तु दुष्ट अपनी दुष्टता में फँस जाते हैं।

7 जब दुष्ट मरते हैं, तो उनकी आशा टूट जाती है, और दुष्टता की आशा नष्ट हो जाती है।

8 धर्मी जन विपत्ति से छूट जाता है, और दुष्ट उसका स्थान ले लेता है। 

9 कपटी जन अपने मुँह से अपने पड़ोसी को नाश करता है, परन्तु ज्ञान के द्वारा धर्मी बचते हैं। 

10 धर्मी की भलाई से नगर आनन्दित होता है, परन्तु जब दुष्ट नाश होते हैं, तब आनन्द होता है।

11 धर्मी के आशीर्वाद से नगर ऊँचा होता है, परन्तु दुष्टों के मुँह से वह नाश हो जाता है।

12 जो अपने पड़ोसी का तिरस्कार करता है, उसमें बुद्धि की कमी होती है, परन्तु समझदार मनुष्य चुप रहता है।

13 शाप देनेवाला भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है।

14 जहाँ बुद्धि की युक्ति नहीं, वहाँ प्रजा विपत्ति में पड़ जाती है, परन्तु बहुत से मन्त्रियों के द्वारा सुरक्षा होती है।

15 जो पराए का जामिन होता है, वह निश्चय ही दुःख उठाता है, परन्तु जो जामिन से घृणा करता है, वह सुरक्षित रहता है।

16 अनुग्रहकारी स्त्री मान की रक्षा करती है, जैसे हिंसक पुरुष धन की रक्षा करते हैं। 

17 दयालु मनुष्य अपने ही प्राण को लाभ पहुँचाता है, परन्तु क्रूर मनुष्य अपने ही शरीर को कष्ट पहुँचाता है।

18 दुष्ट छल से कमाई करता है, परन्तु जो धर्म का बीज बोता है, उसे निश्चय फल मिलेगा।

19 जैसे धार्मिकता जीवन की ओर ले जाती है, वैसे ही जो बुराई का पीछा करता है, वह मृत्यु की ओर ले जाता है।

20 जो मन के कुटिल हैं, वे यहोवा को घृणा करते हैं, परन्तु जो अपने चालचलन में खरे हैं, उनसे वह प्रसन्न होता है।

21 चाहे हाथ से हाथ मिला लिया जाए, तो भी बुराई दण्ड से नहीं बचेगी, परन्तु धर्मी की सन्तान बच जाएगी।

22 जैसे सूअर की थूथन में सोने के रत्न होते हैं, वैसी ही सुन्दर स्त्री होती है जो समझ से परे होती है।

23 धर्मी की इच्छा तो केवल भलाई की होती है, परन्तु दुष्टों की आशा क्रोध की होती है।

24 कुछ लोग ऐसे हैं जो बिखेरते तो हैं, परन्तु फिर भी बढ़ते जाते हैं; और कुछ ऐसे भी हैं जो उचित से अधिक नहीं देते, परन्तु इससे उनका नुकसान होता है।

 25 उदार प्राणी हृष्ट-पुष्ट हो जाएगा, और जो सींचता है, उसे सींचा जाएगा।

26 जो अन्न नहीं देता, उसे लोग शाप देंगे, परन्तु बेचनेवाले के सिर पर आशीर्वाद होगा।

27 जो भलाई की खोज में रहता है, वह कृपा पाने की जल्दी करता है, परन्तु जो विपत्ति की खोज में रहता है, वह उसे पाता है।

28 जो अपने धन पर भरोसा रखता है, वह गिर जाता है, परन्तु धर्मी लोग डाली की नाईं फलते-फूलते हैं।

29 जो अपने घराने को कष्ट देता है, वह वायु का वारिस होगा, और मूर्ख लोग विवेकशील लोगों का दास बनेंगे।

30 धर्मी का फल जीवन का वृक्ष है, और जो मन को जीत लेता है, वह बुद्धिमान है।

31 देखो, धर्मी लोग पृथ्वी पर दण्ड पाते हैं; फिर दुष्ट और पापी लोग तो और भी अधिक दण्ड पाएंगे!

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