segunda-feira, 28 de julho de 2025

सुलैमान के नीतिवचन 14

 सुलैमान के नीतिवचन 14


1 हर बुद्धिमान स्त्री अपना घर बनाती है, परन्तु मूर्ख स्त्री उसे अपने ही हाथों से ढा देती है।

2 जो खराई से चलता है, वह यहोवा का भय मानता है, परन्तु जो उसके मार्ग से भटक जाता है, वह उसका तिरस्कार करता है।

3 मूर्ख के मुँह में घमंड की छड़ी होती है, परन्तु बुद्धिमान के वचन उसे बचाए रखते हैं।

4 जहाँ बैल नहीं होते, वहाँ खलिहान साफ रहता है, परन्तु बैल के बल से फसल बहुतायत में होती है।

5 सच्चा साक्षी झूठ नहीं बोलता, परन्तु झूठा साक्षी झूठ बोलता है।

6 ठट्ठा करनेवाला बुद्धि ढूँढ़ता तो है, परन्तु पाता नहीं, परन्तु बुद्धिमान को ज्ञान सहज से मिलता है।

7 मूर्ख के सामने चलो, और तुम उसके ज्ञान की बातें न पाओगे।

8 बुद्धिमान की बुद्धि अपने मार्ग को समझना है, परन्तु मूर्खों की मूर्खता धोखा देना है।

 9 मूर्ख पाप का उपहास करते हैं, परन्तु धर्मी लोगों में भलाई होती है।

10 मन अपनी ही कड़वाहट जानता है, और कोई पराया उसके आनन्द में बाधा नहीं डालता।

11 दुष्टों का घर नाश हो जाएगा, परन्तु धर्मी का तम्बू फलता-फूलता रहेगा।

12 ऐसा मार्ग है जो मनुष्य को सीधा लगता है, परन्तु उसका अन्त मृत्यु ही है।

13 हँसी के द्वारा भी मन दुःखी होगा, और आनन्द का अन्त शोक है।

14 भटकनेवाला अपने ही मार्गों से सन्तुष्ट रहता है, परन्तु भला मनुष्य अपने ही से सन्तुष्ट रहता है।

15 भोला मनुष्य तो हर एक बात पर विश्वास करता है, परन्तु चतुर मनुष्य सोच-समझकर कदम रखता है।

16 बुद्धिमान मनुष्य डरकर बुराई से दूर रहता है, परन्तु मूर्ख क्रोध करके निडर रहता है।

17 जो शीघ्रता से चलता है, वह मूर्खतापूर्ण काम करेगा, और बुरी युक्ति करनेवाले से लोग घृणा करेंगे। 

18 भोला मनुष्य मूर्खता का वारिस होता है, परन्तु चतुर मनुष्य ज्ञान का मुकुट धारण करता है।

19 बुरे लोग भले लोगों के सामने और दुष्ट लोग धर्मी लोगों के द्वार पर दण्डवत् करते हैं।

20 गरीबों से उनके पड़ोसी भी घृणा करते हैं, परन्तु धनी के बहुत से मित्र होते हैं।

21 जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता है, वह पाप करता है, परन्तु जो नम्र लोगों पर दया करता है, वह धन्य होता है।

22 क्या बुरे लोग गलती नहीं करते? परन्तु जो भलाई करते हैं, वे कृपा और सच्चाई दिखाते हैं।

23 हर प्रकार के परिश्रम में लाभ होता है, परन्तु होठों की बातें केवल दरिद्रता की ओर ले जाती हैं।

24 बुद्धिमानों का मुकुट उनका धन है, परन्तु मूर्खों की मूर्खता केवल मूर्खता है।

25 सच्चा साक्षी प्राणों को बचाता है, परन्तु जो झूठ बोलता है, वह छल करता है।

26 यहोवा के भय से दृढ़ भरोसा होता है, और वह अपने बच्चों के लिए शरणस्थान ठहरेगा।

27 यहोवा का भय जीवन का सोता है, जो मनुष्य को मृत्यु के फन्दों से बचाता है।

28 राजा की महिमा प्रजा की बहुतायत में होती है, परन्तु हाकिम की विपत्ति प्रजा की होती है।

29 जो क्रोध करने में धीमा है, वह बड़ी समझ रखता है, परन्तु जो मन में उतावली करता है, वह मूर्खता को बढ़ाता है।

30 स्वस्थ मन तन का जीवन है, परन्तु ईर्ष्या हड्डियों को सड़ा देती है।

31 जो निर्धन पर अत्याचार करता है, वह अपने रचयिता का अपमान करता है, परन्तु जो दरिद्र पर दया करता है, वह उसका आदर करता है।

32 दुष्ट अपनी दुष्टता के कारण भटक जाता है, परन्तु धर्मी अपनी मृत्यु में भी आशा रखता है।

33 बुद्धि बुद्धिमान के हृदय में वास करती है, परन्तु मूर्खों के हृदय में जो है वह प्रगट हो जाता है।

34 धर्म जाति को बढ़ाता है, परन्तु पाप किसी भी जाति के लिए निन्दा का कारण होता है। 

35 राजा बुद्धिमान सेवक से प्रसन्न होता है, परन्तु उसका क्रोध बेईमान सेवक पर पड़ता है।

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