sexta-feira, 4 de julho de 2025

भजन 123 तिरस्कृत विश्वासी की प्रार्थना

 भजन 123

तिरस्कृत विश्वासी की प्रार्थना


1 हे स्वर्ग में निवास करनेवाले, मैं तेरी ओर अपनी आँखें लगाता हूँ।

2 देख, जैसे दासों की आँखें अपने स्वामियों के हाथ की ओर, और दासी की आँखें अपनी स्वामिनी के हाथ की ओर लगी रहती हैं, वैसे ही हमारी आँखें अपने परमेश्वर यहोवा की ओर लगी रहती हैं, जब तक कि वह हम पर दया न करे।

3 हे यहोवा, हम पर दया कर, हम पर दया कर, क्योंकि हम अपमान से बहुत हो चुके हैं।

4 हमारा मन उन लोगों के तिरस्कार से भरा है जो अपने आराम में रहते हैं, और अभिमानियों के तिरस्कार से।

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