भजन संहिता 119
प्रभु की व्यवस्था की उत्कृष्टता और उसका पालन करने वालों का आशीर्वाद
41-48
41 हे प्रभु, तेरी करुणा मुझ पर आए, और तेरा उद्धार तेरे वचन के अनुसार हो।
42 तब मैं अपने निन्दा करनेवाले को उत्तर दूंगा, क्योंकि मैं तेरे वचन पर भरोसा रखता हूं।
43 और सत्य के वचन को अपने मुंह से कभी न निकालूंगा, क्योंकि मैं तेरे नियमों को दृढ़ता से थामे रहूंगा।
44 तब मैं तेरे नियम का पालन सदा सर्वदा करता रहूंगा।
45 और मैं स्वतंत्रता से चलता रहूंगा, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों की खोज में लगा हूं।
46 मैं राजाओं के सामने भी तेरी चितौनियों की चर्चा करूंगा, और लज्जित न होऊंगा।
47 और मैं तेरी आज्ञाओं से, जो मुझे प्रिय हैं, प्रसन्न रहूंगा।
48 मैं तेरी आज्ञाओं की ओर, जो मुझे प्रिय हैं, हाथ उठाऊंगा, और तेरी विधियों पर ध्यान करूंगा।
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