terça-feira, 1 de julho de 2025

भजन संहिता 119 प्रभु की व्यवस्था की श्रेष्ठता और उसे माननेवालों की प्रसन्नता 17-24

 भजन संहिता 119

प्रभु की व्यवस्था की श्रेष्ठता और उसे माननेवालों की प्रसन्नता

17-24


17 अपने दास के साथ उदारता से पेश आ, कि मैं जीवित रहूँ और तेरे वचन पर चलता रहूँ।

18 मेरी आँखें खोल दे, कि मैं तेरे नियम की अद्भुत बातें देख सकूँ।

19 मैं पृथ्वी पर परदेशी हूँ; अपनी आज्ञाएँ मुझसे मत छिपा।

20 मेरा मन तेरे नियमों की लालसा करते-करते टूट गया है।

21 तूने अभिमानियों और शापितों को, जो तेरी आज्ञाओं से भटक जाते हैं, डाँटा है।

22 मुझ से निन्दा और अपमान दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चितौनियों को मानता हूँ।

23 जब हाकिम मेरे विरुद्ध षड्यन्त्र रचते और बोलते थे, तब तेरा दास तेरे नियमों पर मनन करता था।

24 तेरी चितौनियाँ मेरा आनन्द और मेरी सम्मति हैं।

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