quarta-feira, 2 de julho de 2025

भजन संहिता 119 प्रभु की व्यवस्था की श्रेष्ठता और उसे माननेवालों की प्रसन्नता 113 से 120

 भजन संहिता 119

प्रभु की व्यवस्था की श्रेष्ठता और उसे माननेवालों की प्रसन्नता

113 से 120


113 मैं दुराग्रह से घृणा करता हूँ, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हूँ।

114 तू मेरा शरणस्थान और मेरी ढाल है; मैं तेरे वचन पर आशा रखता हूँ।

115 हे कुकर्मियों, मेरे पास से दूर हो जा, कि मैं अपने परमेश्वर की आज्ञाओं को मान सकूँ।

116 अपने वचन के अनुसार मुझे थामे रह, कि मैं जीवित रहूँ; और मुझे अपनी आशा से लज्जित न होने दे।

117 मुझे थामे रह, तब मैं उद्धार पाऊँगा; और मैं तेरी विधियों से निरन्तर प्रसन्न रहूँगा।

118 तू उन सभों को तुच्छ जानता है, जो तेरी विधियों से भटक जाते हैं, क्योंकि उनका छल झूठ है।

119 तू पृथ्वी के सब दुष्टों को धातु के मैल के समान दूर करता है, इसलिये मैं तेरी चितौनियों से प्रीति रखता हूँ।

120 मेरा शरीर तेरे भय से काँपता है, और मैं तेरे नियमों से डरता हूँ।

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