segunda-feira, 27 de outubro de 2025

भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 45

 भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 45


1 यहोवा अपने अभिषिक्त कुस्रू से, जिसका दाहिना हाथ मैंने उसके सामने जातियों को दबाने के लिए थामा है, यों कहता है: मैं राजाओं की कमर ढीली करूँगा, उसके सामने द्वार खोलूँगा, और फाटक बंद न होंगे।

2 मैं तुम्हारे आगे-आगे चलूँगा और टेढ़े-मेढ़े रास्तों को सीधा करूँगा; मैं काँसे के फाटकों को तोड़ दूँगा और लोहे के बेड़ों को टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।

3 मैं तुम्हें अंधकार के भण्डार और गुप्त धन दूँगा, ताकि तुम जान सको कि मैं यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर हूँ, जो तुम्हें तुम्हारे नाम से पुकारता है।

4 अपने दास याकूब और अपने चुने हुए इस्राएल के निमित्त, मैं तुम्हें तुम्हारे नाम से पुकारूँगा; यद्यपि तुम मुझे नहीं जानते, फिर भी मैंने तुम्हें तुम्हारा उपनाम दिया है।

5 मैं यहोवा हूँ, और कोई नहीं; मेरे सिवा कोई परमेश्वर नहीं; मैं तुम्हारी कमर बाँधूँगा, यद्यपि तुम मुझे नहीं जानते।

 6 ताकि वे उदयाचल से लेकर पश्चिम तक जान लें कि मुझ बिना कोई नहीं है: मैं यहोवा हूँ और कोई दूसरा नहीं है।

7 मैं उजियाला बनाता और अन्धकार रचता हूँ; मैं शान्ति दाता और विपत्ति रचता हूँ; मैं, यहोवा, ये सब काम करता हूँ।

8 हे आकाश, ऊपर से बरस पड़ो, और बादल धर्म की वर्षा करें; पृथ्वी खुल जाए और उद्धार फूट निकले, और धर्म एक साथ उग आए; मैं, यहोवा, ने इन्हें रचा है।

9 हाय उस पर जो अपने रचयिता से झगड़ता है! मिट्टी के ठीकरों के बीच ठीकरा! क्या मिट्टी अपने रचनेवाले से कहे, 'तू क्या बना रहा है?' या तेरे काम से, 'क्या तेरे हाथ नहीं हैं?'

10 हाय उस पर जो अपने पिता से कहे, 'तू क्या जन रहा है?' या अपनी पत्नी से कहे, 'तू क्या जन रही है?'

11 यहोवा, जो इस्राएल का पवित्र है, जो उसका रचयिता है, यों कहता है: आनेवाली बातें मुझ से पूछ; मेरे बच्चों और मेरे हाथों के काम के विषय में मुझसे पूछो।

12 मैंने पृथ्वी बनाई और उस पर मनुष्य को सृजा; मैंने उसे बनाया; मेरे हाथों ने आकाश को तान दिया, और मैंने उनके सभी सेनाओं को आज्ञा दी।

13 मैंने उसे धार्मिकता में जगाया है, और मैं उसके सभी मार्गों को सीधा करूँगा: वह मेरे शहर का निर्माण करेगा, और वह मेरे बंधुओं को रिहा करेगा, न कि मूल्य या इनाम के लिए, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।

14 यहोवा यों कहता है: मिस्रियों का श्रम, और कूशियों का व्यापार, और सबाई लोग, जो डील-डौल वाले पुरुष हैं, तुम्हारे पास आएँगे, और वे तुम्हारे होंगे; वे बेड़ियों में जकड़े हुए तुम्हारे पीछे आएंगे, और तुम्हारे सामने झुकेंगे; वे तुमसे विनती करेंगे, 'निश्चय परमेश्वर तुम्हारे भीतर है, और कोई दूसरा ईश्वर नहीं है।'

15 सचमुच तुम ही वह ईश्वर हो जो अपने आप को छिपाता है, इस्राएल का परमेश्वर, उद्धारकर्ता। 

16 वे लज्जित होंगे, वे सब के सब लज्जित होंगे; जो मूरतें बनाते हैं वे सब लज्जित होकर गिर पड़ेंगे।

17 परन्तु इस्राएल यहोवा के द्वारा अनन्त उद्धार के द्वारा बचा लिया गया है; इसलिये तुम युगानुयुग न लज्जित और न घबराओगे।

18 क्योंकि यहोवा, जिसने आकाश को बनाया, जिस परमेश्वर ने पृथ्वी को रचा और बनाया; उसी ने उसे स्थिर किया; उसने उसे व्यर्थ नहीं बनाया, परन्तु बसने के लिये रचा है, वही यों कहता है: मैं यहोवा हूँ, और कोई दूसरा नहीं है।

19 मैं ने न तो गुप्त में, न पृथ्वी के किसी अन्धकारमय स्थान में बातें कीं; मैं ने याकूब के घराने से नहीं कहा, 'मुझे व्यर्थ ढूंढ़ो! मैं यहोवा हूं, जो धर्म की बातें कहता और सही बातें बताता हूं।'

20 हे जातियों में से बचे हुए लोगों, इकट्ठे होकर आओ; एक साथ निकट आओ! वे कुछ नहीं जानते जो अपनी लकड़ी की खुदी हुई मूर्तियों को जुलूस में लिए फिरते हैं और ऐसे देवता से प्रार्थना करते हैं जो बचा नहीं सकता। 

21 घोषणा करो, और निकट आओ, और एक साथ सम्मति करो: किसने यह प्राचीन काल में घोषित किया था? किसने इसे तब से घोषित किया है? मैं नहीं हूँ; मेरे सिवा कोई धर्मी परमेश्वर और उद्धारकर्ता नहीं है।

22 हे पृथ्वी के दूर दूर देशों के लोगों, मेरी ओर फिरो और उद्धार पाओ; क्योंकि मैं ही परमेश्वर हूँ और कोई दूसरा नहीं।

23 मैं ने अपनी ही शपथ खाई है; धर्म का वचन मेरे मुख से निकला है और वह फिर न लौटेगा; कि हर एक घुटना मेरे साम्हने झुकेगा, और हर एक जीभ मेरी ही शपथ खाएगी।

24 मेरे विषय में कहा जाएगा, निश्चय यहोवा में धर्म और पराक्रम है; जितने उस से क्रोधित हैं वे सब आकर लज्जित होंगे।

25 परन्तु यहोवा में इस्राएल के सारे वंश धर्मी ठहरेंगे, और घमण्ड करेंगे।

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