sexta-feira, 7 de janeiro de 2022

द्वितीय शमूएल 11 दाऊद ने व्यभिचार और हत्या की

 द्वितीय शमूएल 11

दाऊद ने व्यभिचार और हत्या की

1 और जब राजाओं के निकलते समय एक वर्ष बीत गया, तब दाऊद ने योआब और उसके कर्मचारियोंको और सब इस्राएलियोंको भेज दिया, कि वे अम्मोनियोंको नाश करें, और रब्बा को घेर लें; परन्तु दाऊद यरूशलेम में रहा।

2 और सांफ को ऐसा हुआ कि दाऊद अपके बिछौने पर से उठा, और राजभवन की छत पर टहल रहा या, और उस ने छत पर से जो अपने आप को धो रही थी, एक स्त्री देखी; और वह स्त्री देखने में अति सुन्दर थी।

3 तब दाऊद ने उस स्त्री को बुलवा भेजा, और उन्होंने कहा, क्या यह हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी एलीआम की बेटी बतशेबा नहीं है?

4 तब दाऊद ने दूतोंको भेजकर उसको बुलवा भेजा, कि वह उसके पास भीतर गई, और उसके साथ लेट गई (और वह अपक्की मलिनता से शुद्ध हो गई), तब वह अपके घर लौट गई।

5 और वह स्त्री गर्भवती हुई; और उस ने भेजकर दाऊद को प्रगट किया, और कहा, मैं भारी हूं।

6 तब दाऊद ने योआब के पास कहला भेजा, कि हित्ती ऊरिय्याह को मेरे पास भेज। और योआब ने ऊरिय्याह को दाऊद के पास भेजा।

7 जब ऊरिय्याह उसके पास आया, तब दाऊद ने पूछा, कि योआब कैसा है, और प्रजा कैसी है, और युद्ध कैसा चल रहा है।

8 तब दाऊद ने ऊरिय्याह से कहा, अपके घर जाकर अपके पांव धो। और ऊरिय्याह, राजभवन छोड़कर, शीघ्र ही उसके पीछे हो लिया, जो राजा का स्वादिष्ट भोजन था।

9 परन्तु ऊरिय्याह अपके प्रभु के सब कर्मचारियों समेत राजभवन के द्वार पर लेट गया, और अपके घर को न गया।

10 और उन्होंने दाऊद से कहा, ऊरिय्याह अपके घर न गया। तब दाऊद ने ऊरिय्याह से कहा, क्या तू यात्रा से नहीं आता? तुम अपने घर क्यों नहीं गए?

11 ऊरिय्याह ने दाऊद से कहा, सन्दूक और इस्राएल और यहूदा अपने डेरोंमें हैं; और मेरे प्रभु योआब और मेरे प्रभु के सेवकों ने मैदान में डेरे खड़े किए हैं; और क्या मैं अपके घर में खाने-पीने, और अपक्की पत्नी के संग सोने को जाऊं? तेरे जीवन के लिए, और तेरी आत्मा के जीवन के लिए, मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा।

12 तब दाऊद ने ऊरिय्याह से कहा, आज यहीं ठहर, और कल मैं तुझे विदा करूंगा। ऊरिय्याह उस दिन और अगले दिन यरूशलेम में रहा।

13 दाऊद ने उसको न्यौता दिया, और उस ने उसके साम्हने खाया पिया, और उसको मतवाला किया; और सांफ को वह अपके प्रभु के कर्मचारियोंके संग अपके बिछौने पर लेटने को निकला; परन्तु वह अपके घर न गया।

14 बिहान को दाऊद ने योआब को एक चिट्ठी लिखकर ऊरिय्याह के हाथ से भेजी।

15 उस ने चिट्ठी में लिखा, ऊरिय्याह को युद्ध के सबसे बड़े बल के साम्हने खड़ा कर; और उसके पीछे से हट जाओ, कि वह घायल होकर मर जाए।

16 जब योआब ने नगर को अच्छी रीति से देख लिया, तब उस ने ऊरिय्याह को उस स्यान में रखा, जहां वह जानता था, कि शूरवीर हैं।

17 और जब वे पुरूष नगर से निकलकर योआब से लड़ने लगे, तब दाऊद के दासोंमें से कितने लोग मारे गए, और हित्ती ऊरिय्याह भी मर गया।

18 तब उस ने योआब को भेजकर दाऊद को उस युद्ध का सब काम बता दिया।

19 और उस ने दूत को यह आज्ञा दी, कि जब तू राजा को इस युद्ध का सब काम पूरा कर चुका;

20 और जब राजा क्रोधित होकर तुझ से कहे, कि तू लड़ने को नगर के इतने निकट क्यों आया है? क्या आप नहीं जानते थे कि आप दीवार से फेंक देंगे?

21 यरूबेसेत के पुत्र अबीमेलेक को किसने मारा? क्या किसी स्त्री ने उस पर चक्की के पाट का एक टुकड़ा उस शहरपनाह पर से नहीं फेंका, जिस से वह तेबेस में मरा? आप दीवार पर क्यों आए? तब तू कहना, तेरा दास हित्ती ऊरिय्याह भी मर गया।

22 तब दूत ने जाकर भीतर जाकर जो कुछ योआब ने उसे भेजा या, वह सब दाऊद को बता दिया।

23 तब दूत ने दाऊद से कहा, निश्चय वे पुरूष हम से बलवन्त थे, और मैदान में हमारे पास निकल आए; परन्तु हम उनका साम्हना फाटक के द्वार तक करते थे।

24 तब धनुर्धारियों ने तेरे सेवकोंको शहरपनाह की ऊपर से घात किया, और राजा के कितने कर्मचारी मारे गए, और तेरा दास हित्ती ऊरिय्याह भी मर गया।

25 तब दाऊद ने दूत से कहा, तू योआब से योंकहना, कि यह तेरी दृष्टि में बुरा न लगे; क्‍योंकि तलवार उसको भी भस्म कर देती है; नगर से युद्ध करके हार मानो; इसी प्रकार उसका उत्‍सव करो।

26 जब ऊरिय्याह की पत्नी ने सुना कि उसका पति ऊरिय्याह मारा गया है, तब वह अपने स्वामी के पास विलाप करने लगी।

27 और जब उसे घिन हुई, तब उस ने दाऊद को अपके घर में बटोरने के लिथे भेजा, और वह उसकी पत्नी या, और उस से उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ। परन्तु जो काम दाऊद ने किया वह यहोवा की दृष्टि में बुरा लगा।

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