लेवीय 27
पवित्र वस्तुओं के लिए कोई फिरौती नहीं है
28 फिर भी, कोई पवित्रा वस्तु न हो, कि जो कोई मनुष्य, या पशू या उसकी भूमि के खेत में से, चाहे जो कुछ उसके पास है, वह यहोवा के द्वारा अर्पित किया जाए, या उसे छुड़ाया जाए; हर पवित्रा वस्तु यहोवा के लिये पवित्र होगी।
29 जो कोई पवित्रा वस्तु मनुष्य के पवित्रा वस्तु का पुरूष है, उसे छुड़ाया नहीं जाएगा: वह निश्चित रूप से मर जाएगा।
30 और मैदान के सभी पेड़ों के मैदान के दसवें भाग को, जो कि वृक्ष के फल का है, यहोवा के हैं; वे यहोवा के लिये पवित्र हैं।
31 परन्तु यदि कोई अपना दशमांश किसी वस्तु का मोल ले लेता है, तो वह उसका पांचवां हिस्सा उसको जोड़ देगा।
32 जो पशु और भेड़ों के दसवें दशमांश के छल्ले के नीचे से गुजरते हैं, उनको दशमांश का दशमांश, दसवें भाग यहोवा के लिये पवित्र ठहरेगा।
33 वह अच्छाई और बुराई की खोज नहीं करेगा, न तो उसका बदला लेगा, और उसका आदान-प्रदान पवित्र रहेगा; रिडीम नहीं किया जाएगा
34 ये आज्ञाएं हैं जो यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी, क्योंकि इस्राएलियों से सीनै पर्वत पर थे।
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