मैं किंग्स 8
सुलैमान भगवान से प्रार्थना करता है
22 और सुलैमान यहोवा की वेदी के साम्हने, अर्यात् इस्राएल की सारी मण्डली के साम्हने खड़ा हुआ; और उस ने अपके हाथ आकाश की ओर फैलाकर कहा,
23 और उस ने कहा, हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, तेरे तुल्य न तो ऊपर आकाश में और न नीचे पृथ्वी पर कोई परमेश्वर है, जो तेरे उन दासोंके साय अपक्की वाचा और करूणा रखते हैं, जो अपके सम्मुख अपके सम्मुख होकर चलते हैं।
24 जो तू ने अपके दास मेरे पिता दाऊद से किया या, जो तू ने उस से कहा या, क्योंकि तू ने अपके मुंह से कहा और अपके हाथ से किया या, जैसा आज प्रगट है।
25 इसलिथे अब, हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, अपके दास मेरे पिता दाऊद से वह कर जो तू ने उस से कहा या, कि मेरे साम्हने इस्राएल की गद्दी पर विराजमान होने के लिथे तेरा कोई उत्तराधिकारी न होगा, केवल यह कि तेरे पुत्र अपके मार्ग पर बने रहें , जैसे तुम मेरे आगे चले वैसे ही मेरे आगे चलना।
26 अब हे इस्राएल के परमेश्वर, तेरा वचन भी पूरा हो जो तू ने अपके दास मेरे पिता दाऊद से कहा या।
27 परन्तु क्या परमेश्वर सचमुच पृय्वी पर वास करेगा? देख, स्वर्ग और स्वर्ग का स्वर्ग भी तुझे समाहित न कर सका, फिर यह भवन जो मैं ने बनाया है कितना ही कम हो।
28 इसलिथे हे मेरे परमेश्वर यहोवा, अपके दास की प्रार्यना और गिड़गिड़ाहट की ओर कान लगा, कि जो पुकार तेरा दास आज तेरे साम्हने कर रहा है उसको तू सुन ले।
29 जिस से तेरी आंखें इस भवन पर, इसी स्थान पर, जिसके विषय में तू ने कहा, कि मेरा नाम वहां रहेगा, रात दिन खुली रहें; तेरा दास जो प्रार्थना इस स्थान पर करता है उसे सुन।
30 इसलिथे अपके दास, और अपक्की प्रजा इस्राएल की प्रार्यना जब वे इस स्यान में प्रार्यना करें, तब उसकी सुन; तू भी अपके धाम स्वर्ग में सुन; आप भी सुनें और क्षमा करें।
31 यदि कोई तेरे पड़ोसी का अपराध करे, और वे उस से शपय खाकर उस से शपय खाएं, और वह शपय इस भवन में तेरी वेदी के साम्हने आए,
32 तब तू स्वर्ग में से सुनना, और काम करना, और अपके दासोंका न्याय करना, और कुटिल को दण्ड देना, अपक्की चाल उसी के सिर पर डालना, और धर्मी को निर्दोष ठहराना, और उसके धर्म के अनुसार उस से व्यवहार करना।
33 जब तेरी प्रजा इस्राएल तेरे विरुद्ध पाप करने के कारण शत्रुओं से हार जाए, और वे तेरी ओर फिरकर तेरा नाम मानें, और इस भवन में तुझ से प्रार्यना और गिड़गिड़ाहट करें,
34 तब तू स्वर्ग में से सुनना, और अपक्की प्रजा इस्राएल का पाप झमा करना, और उनको इस देश में लौटा ले आना जो तू ने उनके पूर्वजोंको दिया या।
35 जब आकाश बन्द हो जाए, और वर्षा न हो, क्योंकि उन्होंने तेरे विरूद्ध पाप किया है, और वे इस स्यान में प्रार्यना करके तेरे नाम का अंगीकार करें, और अपके पाप से फिरें, इसलिथे कि तू ने उन्हें दु:ख दिया है,
36 तब तू स्वर्ग में से सुनना, और अपके दासोंऔर अपक्की प्रजा इस्राएल का पाप झमा करना, और उनको वह अच्छा मार्ग सिखाना जिस से वे चलें, और अपके इस देश पर जो तू ने अपक्की प्रजा का निज भाग करके दिया है जल बरसाए।
37 जब देश में अकाल पड़े, वा मरी वा अन्न जल जाए, वा झुलस, टिड्डियां, और कीड़े लगें, जब तेरा शत्रु तेरे फाटकोंके देश में तुझे घेर रखे, वा कोई व्याधि वा रोग हो,
38 तेरी सारी प्रजा इस्राएल में से जितने प्रार्यना वा गिड़गिड़ाहट करें, वे अपके अपके ह्रृदय का शोक जानकर अपके हाथ इस भवन की ओर फैलाएं,
39 तब तू अपके अपके निवासस्यान स्वर्ग में से सुनकर क्षमा करना, और करना, और एक एक के मन के अनुसार उसकी सारी चालचलन के अनुसार उसे देना; क्योंकि केवल तू ही सब मनुष्योंके मन का जाननेवाला है।
40 जिस से वे उस देश में जितने दिन रहें जो तू ने हमारे पुरखाओं को दिया या, तेरा भय मानते रहें।
41 और उस परदेशी की भी सुनना, जो तेरी प्रजा इस्राएल का न हो, वरन तेरे नाम के निमित्त दूर देश से आए।
42 क्योंकि वे तेरे बड़े नाम, और तेरे बलवन्त हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा की चर्चा करेंगे, और आकर इस भवन में प्रार्थना करेंगे,
43 तू अपके स्यान में जो अपके निवासस्थान है सुन, और जो कुछ परदेशी तुझे पुकारे उसके अनुसार करना, जिस से पृय्वी के देश देश के सब लोग तेरा नाम जाने, और तेरी प्रजा इस्राएल के समान तेरा भय मानें, और जान लें कि तेरा नाम पुकारा जाता है। इस भवन के ऊपर जो मैं ने बनाया है।
44 जब तेरी प्रजा के लोग अपके शत्रुओं से लड़ने को जिस मार्ग से तू उन्हें भेजे उसी मार्ग से निकल जाए, और इस नगर की ओर जिसे तू ने चुना है, और इस भवन की ओर जिसे मैं ने तेरे नाम का बनाया है, यहोवा से प्रार्यना करे। .
45 तब स्वर्ग में से उनकी प्रार्यना और गिड़गिड़ाहट सुनकर उनका पलटा लेना।
46 जब वे तेरे विरुद्ध पाप करें (क्योंकि ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो पाप न करता हो), और तू उन पर क्रोधित हो, और उन्हें शत्रुओं के हाथ में कर दे, कि उनके बन्धुआ करके देश के देश में ले जाएं। दुश्मन, चाहे दूर हो या पास;
47 और जिस देश में वे बंधुआई में गए हैं उस देश में उनके होश ठिकाने आएंगे, और वे फिर जाएंगे, और अपक्की बंधुआई के देश में यह कहकर तुझ से गिड़गिड़ाएंगे, कि हम ने पाप किया, और दुष्टता ही की, और कुटिल काम किया है;
48 और वे अपके शत्रुओंके देश में अपके सारे मन और सारे प्राण से तेरी ओर फिरेंगे, और अपके शत्रुओंके देश में जो उनको बन्धुआ करके ले गए थे, तुझ से प्रार्यना करेंगे, और अपके अपके पुरखाओंको जो तू ने इस नगर के लिथे दिया या, इस नगर के लिथे तुझ से प्रार्यना करेंगे। चुना है, और इस भवन के निमित्त जो मैं ने तेरे नाम के लिथे बनाया है;
49 तब तू जो अपके धाम स्वर्ग में है उसकी प्रार्यना और गिड़गिड़ाहट सुनना, और न्याय के साय करना;
50 और अपक्की प्रजा के लोग जो तेरे विरुद्ध पाप करें, अर्यात् जितने अपराध उन्होंने तेरे विरुद्ध किए हैं, उन सभोंको झमा करना; 17 जो उन्हें बन्धुआई में रखते हैं उन पर दया करना, कि वे दया करें।
51 क्योंकि वे तेरी प्रजा और तेरा निज भाग हैं, जिन्हें तू लोहे के भट्ठे के बीच में से, अर्यात् मिस्र देश से निकाल लाया है;
52 जिस से तेरी आंखें अपक्की प्रजा इस्राएल की गिड़गिड़ाहट की ओर खुली रहें, और जब वे तुझ से दोहाई दें तब तू उनकी सुन ले।
53 क्योंकि हे यहोवा यहोवा, तू ने उन को अपके निज भाग होने के लिथे पृय्वी की सब जातियोंमें से चुना है, जैसा तू ने अपके दास मूसा के द्वारा उस समय कहा या, जब तू हमारे पुरखाओं को मिस्र से निकाल लाया।