quarta-feira, 25 de janeiro de 2023

मैं किंग्स 6 सुलैमान मंदिर बनाता है

 मैं किंग्स 6

सुलैमान मंदिर बनाता है

1 और इस्राएलियों के मिस्र से निकलने के चार सौ अस्सीवें वर्ष में, इस्राएल पर सुलैमान के राज्य के चौथे वर्ष में, जिव महीने में, (यह दूसरा महीना है), कि उस ने आरम्भ किया। यहोवा का भवन बनाने के लिथे .
2 और जो भवन राजा सुलैमान ने यहोवा के लिथे बनाया या, उसकी लम्बाई साठ हाथ, चौड़ाई बीस हाथ, और ऊंचाई तीस हाथ की यी।
3 और भवन के मन्दिर के साम्हने ओसारे की लम्बाई, भवन की चौड़ाई के बराबर, और भवन के साम्हने की चौड़ाई दस हाथ की यी।
4 और उस ने घर की खिड़कियां सँकरी बनाईं।
5 उस ने भवन की भीत के चारोंओर, भवन के चारोंओर, और भवन और भवन के चारों ओर कोठरियां बनाई; और इसी प्रकार उस ने चारोंओर कोठरियां बनाई।
6 निचला कक्ष पांच हाथ चौड़ा, मध्य छ: हाथ चौड़ा और तीसरा सात हाथ चौड़ा था; क्योंकि उस ने भवन के बाहर चारोंओर बाड़ा बान्धा या, कि वे भवन की शहरपनाह पर न टिके।
7 भवन तैयार किए हुए पत्थरों से बनाया गया, और वे उनको ले आए थे; इसलिये कि जब वे भवन बना रहे थे, तब न तो हथौड़े, न कुल्हाड़े, और न लोहे के किसी और वाद्य का शब्द सुनाई पड़ा।
8 और बीचवाली कोठरी का द्वार भवन की दाहिनी ओर या, और घोंघे घोंघे के बीच बीच पर, और बीच से एक तिहाई पर चढ़ जाते थे।
9 तब उस ने भवन को बनाकर पक्का किया, और भवन को देवदारु के तख़्तोंऔर तख्तोंसे मढ़ा।
10 फिर उसने सारे भवन के लिथे पांच हाथ ऊंची कोठरियां बनवाई, और भवन के लिथे देवदारू की लकड़ी से बाड़ लगाई।
11 तब यहोवा का यह वचन सुलैमान के पास पहुंचा,
12 यह भवन जो तू बना रहा है, यदि तू मेरी विधियोंपर चले, और मेरे नियमोंको माने, और मेरी सब आज्ञाओं पर चलता रहे, और उन पर चलता रहे, तो जो वचन मैं ने तेरे पिता दाऊद को दिया या, उसे पूरा कर सकेगा;
13 और मैं इस्राएलियोंके मध्य निवास करूंगा, और अपक्की प्रजा इस्राएल को न तजूंगा।
14 सो सुलैमान ने भवन को बनाकर उसे सिद्ध किया।
15 और उस ने भवन की भीतरी भीत पर देवदारु की तख्तोंसे मढ़ा; घर के फ़र्श से लेकर छत तक, उसने भीतर की हर चीज़ को लकड़ी से ढक दिया, और घर के फ़र्श को बीच के तख्तों से ढँक दिया।
16 उस ने भवन की अलंगोंपर, फर्श से शहरपनाह तक बीस हाथ के देवदारू तख्ते बनाए;
17 इस प्रकार भवन की लम्बाई चालीस हाथ की, अर्यात् भीतरी भवन की यी।
18 और भवन के भीतर देवदार की खुली हुई कलियां खुदी हुई थीं; सब देवदारु ही था, पत्थर कहीं दिखाई न पड़ता या।
19 और उस ने भीतरी भवन में एक पवित्र वचन तैयार किया, कि वहां यहोवा की वाचा का सन्दूक धरूं।
20 और भीतरी पवित्रस्थान बीस हाथ लम्बा और बीस हाथ ऊंचा या, और उस ने उसको चोखे सोने से मढ़वाया, और वेदी को देवदार से मढ़वाया।
21 और सुलैमान ने भवन के भीतरी भाग को चोखे सोने से मढ़वाया, और पवित्रस्थान के साम्हने बीचवाले पर्दे को सोने की जंजीरों से मढ़ा, और उसको भी सोने से मढ़ा।
22 और उस ने सारे भवन को सोने से मढ़वाया, और जब तक कि सारा भवन बन न गया तब तक वह सब वेदी जो पवित्रस्थान के साम्हने यी, उसको भी उस ने सोने से मढ़वाया।
23 और दर्शन-स्थान में उस ने दस दस हाथ ऊंचे जलपाई की लकड़ी के दो करूब बनाए।
24 और करूब का एक पंख पांच हाथ का, और करूब का दूसरा पंख पांच हाथ का या; उसके एक पंख के सिरे से दूसरे पंख के सिरे तक दस हाथ थे।
25 और दूसरा करूब भी दस हाथ का या; दोनों करूब एक ही नाप और एक ही ऊंचाई के थे।
26 एक करूब की ऊंचाई दस हाथ की है, और वैसे ही दूसरे करूब की भी।
27 और उन करूबोंको उस ने भीतरी भवन के बीच में धराया; और करूबों के पंख ऐसे फैले हुए थे, कि एक करूब का एक पंख दीवार से, और दूसरे करूब का एक पंख दूसरी भीत से लगा हुआ था, और उनके पंख भवन के बीच में एक दूसरे से मिले हुए थे।
28 और उसने करूबों को सोने से मढ़वाया।
29 और भवन के भीतर और बाहर उस ने चारोंओर की सब भीत पर करूब, और खजूर के वृझ, और खिले हुए फूल खुदवाए।
30 और भवन के फर्श को भी उस ने भीतर बाहर सोने से मढ़ा।
31 और भवन के द्वार पर उस ने जलपाई की लकड़ी के दरवाजे बनाए; खम्भोंसमेत चौखट भी शहरपनाह का पांचवां भाग बनी।
32 और दोनों दरवाजे तेल की लकड़ी के बने; और उन पर उस ने करूब, और खजूर के वृझ, और खिले हुए फूल खुदवाए, और उनको सोने से मढ़वाया, और करूबोंऔर खजूरोंपर सोना मढ़वाया।
33 और उस ने मन्दिर की भीत के एक चौथाई भाग पर तेल की लकड़ी के द्वार के लिथे खम्भे बनाए।
34 और दोनोंदरवाजे बीच की लकड़ी के थे, और एक एक द्वार के दोनोंपल्ले हिंगवाले थे, जैसे दूसरे किवाड़ के दोनोंपत्तोंमें भी कब्जे थे।
35 और उस ने उन पर करूब, और खजूर के वृझ, और खिले हुए फूल खुदवाए, और काम के काम पर सोने से मढ़वाया।
36 फिर उस ने भीतरी आंगन को तराशे हुए पत्यरोंके तीन रद्दे, और देवदारु की कडिय़ोंकी एक पंक्ति बनाया।
37 चौथे वर्ष के जीव नाम महीने में यहोवा के भवन की नेव डाली गई।
38 और ग्यारहवें वर्ष के बिल्व नाम महीने के आठवें महीने में, यह भवन अपके सब अंगोंसमेत तैयार हुआ, और उस ने सात वर्ष में उसको बनाया।

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