मैं किंग्स 7
मंदिर के लिए विभिन्न कार्य
13 और राजा सुलैमान ने दूत भेजकर आज्ञा दी, और हीराम को सोर से निकाल ले आया।
14 वह नप्ताली के गोत्र की एक विधवा स्त्री का पुत्र था, और उसका पिता सोर का एक पुरूष या, जो तांबे का काम करता या; और वह पीतल के सब काम करने की बुद्धि और समझ और ज्ञान से परिपूर्ण या;
15 क्योंकि उस ने पीतल के दो खम्भे बनाए; एक एक खम्भे की ऊंचाई अठारह हाथ की यी, और एक एक खम्भे के चारोंओर बारह हाथ की तार लगी।
16 फिर उसने खम्भोंके सिरोंपर लगाने के लिथे पीतल की ढलाई के दो कंगनी भी बनवाए;
17 जाल जाली के बने, और खम्भोंके सिरोंके सिरोंके सिरोंके लिथे जंजीर के बन्धन; एक पूंजी के लिए सात और दूसरी पूंजी के लिए सात।
18 और उस ने अनारोंके सिरोंके सिरोंके सिरोंको ढांपने के लिथे चारोंओर के लिथे दो पांति के खम्भे भी बनाए; ऐसा उसने दूसरी पूंजी के साथ भी किया।
19 और खम्भोंके सिरोंपर जो कंगनियां ओसारे में सोसन के काम की यीं, वे चार हाथ लम्बी यीं।
20 और दोनों खम्भोंके सिरोंकी फुनगीयां साम्हने उस कटोरे के ऊपर रहीं, जो जाल के पास यी; और दूसरे बुर्ज पर भी चारों ओर कतारबद्ध होकर दो सौ अनार थे।
21 तब उस ने उन खम्भोंको भवन के ओसारे में खड़ा कराया; और दाहिने खम्भे को उठाकर उसका नाम याकीन रखा; और बाएँ स्तम्भ को ऊपर उठाकर उसका नाम बोअज रखा।
22 और खम्भोंके सिरोंपर सोसन के फूल बने हुए थे। और इसलिए खंभों पर काम खत्म हो गया था।
23 उस ने एक किनारे से दूसरे सिक्के तक ढाला हुआ हौज बनाया, वह चारों ओर से दस हाथ का या, और पांच हाथ ऊंचा या; और उसके चारोंओर तीस हाथ की डोरी से बान्धा गया।
24 और उसके घेरे के नीचे उसके चारों ओर बटन लगे थे; उन्होंने उस हौद को दस हाथ तक घेर लिया; इन बटनों के दो क्रम उनके फाउंड्री में जुड़े हुए थे।
25 और वह बारह बैलों पर खड़ा था, तीन जो उत्तर की ओर देखते थे, और तीन जो पश्चिम की ओर देखते थे, और तीन जो दक्षिण की ओर देखते थे, और तीन जो पूर्व की ओर उन्मुख थे; और उनके ऊपर समुद्र था, और सब के सब इसके पीछे के हिस्से को अंदर की पट्टी में।
26 और उसकी मोटाई बालपन की यी, और उसका मोहरा प्याले के मोहरे की नाईं वा सोसन के फूल का हो या; उसने दो हजार स्नान किए।
27 फिर उस ने तांबे की दस कुसिर्यां भी बनाईं; एक एक कुर्सी की लम्बाई चार हाथ, चौड़ाई चार हाथ, और ऊंचाई तीन हाथ की यी।
28 और कुसिर्यों की बनावट यह थी, कि उन में पट्टियां बनीं, और पटिए तख्तों के बीच में थे।
29 और तख्तोंके बीच में जो बन्धन थे उन पर सिंह, गाय-बैल, और करूब बने थे, और तख्तोंपर ऊपर का एक पाया, और सिंहोंऔर बैलोंके नीचे काढ़े हुए जूए बने रहे।
30 और एक आधार के लिथे धातु के चार पहिथे, और पीतल की पत्यरें यीं; और उसके चारों कोनों में कन्धे थे; हौदी के नीचे ये कन्धे एक एक जोड़ के पास से जुड़े हुए थे।
31 और उसका मुंह ताज के भीतर और ऊपर एक हाथ का या, और उसका मुंह पाए की बनावट के अनुसार डेढ़ हाथ का गोल या;
32 और चारों पहिथे पट्ठोंके नीचे, और एक एक पहिथे की धुरियां नीचे की ओर यीं, और एक एक पहिथे की ऊंचाई डेढ़ हाथ की यी।
33 और पहियों की बनावट रथ के पहिये की सी थी, और उसकी धुरियां, और कैमरे, और घुंडियां, और आरे, सब के सब ढले हुए थे।
34 और एक एक पाथे के चारोंकोनोंपर चार कन्धे थे, उनके कन्धे पाए के निकले हुए थे।
35 और एक एक पाए के ऊपर चारोंओर आधे हाथ की ऊंचाई गोल यी;
36 और उसके पंखोंके तख्तोंऔर कटिबन्धोंमें चारोंओर की एक एक सन्धि पर उस ने करूब, और सिंह, और खजूर के वृक्ष खुदवाए।
37 जैसे उस ने दसों कुसिर्यां बनाईं, उन सभोंकी एक ही ढलाई, एक ही नाप, और एक ही नक्काशी हो।
38 फिर उस ने तांबे के दस हौदे भी बनाए; एक एक हौद में चालीस बत की, और एक एक हौदी चार हाथ लम्बी, और दसों कुसिर्योंमें से एक एक पर एक हौदी यी।
39 और उस ने पांच कुसिर्यां भवन की दाहिनी ओर, और पांच उसकी बाईं ओर रखीं;
40 तब हीराम ने हौदियों, फावडिय़ों, और कटोरोंको बनाया; और जितना काम वह राजा सुलैमान के लिथे, अर्यात् यहोवा के भवन के लिथे करता या, उस सब को हीराम ने पूरा किया।
41 अर्थात् दो खम्भे, और दोनों खम्भोंके सिरोंपर की गोलाइयोंऔर खम्भोंके सिरोंपर की गोलाइयोंको ढांपने के लिथे दो जाल।
42 और दोनों जालियोंके लिथे चार सौ अनार, अर्यात् खम्भोंके सिरोंके सिरोंके सिरोंके गोलोंको ढांपने के लिथे, एक एक जाली के लिथे अनारोंकी दो दो पांति,
43 और दस कुसिर्यां, और एक एक एक पर दस कुसिर्यां हों;
44 जैसा समुद्र और उसके नीचे के बारह बैल;
45 और हंडियां, फावडिय़ां, कटोरे, और जितने पात्र हीराम ने राजा सुलैमान के लिथे यहोवा के भवन के लिथे बनाए, वे सब चमकाए हुए पीतल के थे।
46 राजा ने उनको यरदन की तराई में कीचड़ देश में पिघला दिया; सुक्कोत और ज़रतान के बीच।
47 और सुलैमान सब पात्रोंको तौलना भूल गया, क्योंकि वे बहुत थे, और ताँबे के तौल का तौल न हो सका।
48 और सुलैमान ने यहोवा के भवन के लिथे जितने पात्र थे, अर्यात् सोने की वेदी, और सोने की मेज, जिस पर भेंट की रोटी रहती यी, सब सुलैमान ने बनाए।
49 और पवित्र स्थान के साम्हने, पांच दाहिनी और पांच बाईं ओर दीवट, चोखे सोने के, और फूल, और दीपक, और बत्ती, वह भी सोने के।
50 और चोखे सोने के कटोरे, तसले, कटोरे, गन्धी, और अंगीठी, और भीतरी भवन के किवाड़ के खूंटे परमपवित्र स्थान के, और भवन के द्वार के खूंटे। मंदिर, सोने का।
51 इस प्रकार सुलैमान राजा ने यहोवा के भवन के लिथे जो जो काम किया वह सब पूरा हुआ; तब सुलैमान अपके पिता दाऊद की पवित्र की हुई वस्तुओं को ले आया; चाँदी, सोना और पात्र उस ने यहोवा के भवन के भणडारोंमें रख दिए।
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