quarta-feira, 5 de novembro de 2025

भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 61 उद्धार की घोषणा की गई है

 भविष्यवक्ता यशायाह की पुस्तक 61

उद्धार की घोषणा की गई है


1 प्रभु परमेश्वर का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि प्रभु ने मुझे नम्र लोगों को शुभ समाचार सुनाने के लिए अभिषेक किया है; उसने मुझे टूटे मनवालों को शान्ति देने, बंदियों को स्वतंत्रता का और बन्धुओं के लिए बन्दीगृह के खुलने का प्रचार करने के लिए भेजा है;

2 प्रभु के प्रसन्नता के वर्ष और हमारे परमेश्वर के प्रतिशोध के दिन का प्रचार करने; सब शोक करनेवालों को शान्ति देने;

3 सिय्योन में विलाप करनेवालों को राख की सन्ती सुन्दरता, विलाप की सन्ती आनन्द का तेल, और उदासी की सन्ती स्तुति का वस्त्र देने के लिए नियुक्त किया है; ताकि वे धर्म के वृक्ष, अर्थात् प्रभु के लगाए हुए कहलाएँ, जिससे उसकी महिमा हो।

4 वे पुराने उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएँगे, वे पुराने उजड़े हुए स्थानों को फिर से बसाएँगे, और वे उजड़े हुए नगरों को, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी उजड़े हुए हैं, फिर से बसाएँगे।

5 और परदेशी तुम्हारे झुण्ड चराएँगे; परदेशी तुम्हारे किसान और तुम्हारे दाख की बारी के माली होंगे।

6 परन्तु तुम यहोवा के याजक कहलाओगे, हमारे परमेश्वर के सेवक कहलाओगे; तुम अन्यजातियों की बहुतायत से चरोगे, और उनकी महिमा पर घमण्ड करोगे।

7 तुम्हारी दुगुनी लज्जा और अपमान के कारण, वे अपने भाग में आनन्दित होंगे; इसलिए वे अपने देश में दुगुनी संपत्ति के अधिकारी होंगे, और सदा आनन्दित रहेंगे।

8 क्योंकि मैं यहोवा न्याय से प्रीति रखता हूँ, दुष्टता से घृणा करता हूँ। मैं उन्हें सच्चाई से प्रतिफल दूँगा और उनके साथ सदा की वाचा बाँधूँगा।

9 उनकी सन्तान अन्यजातियों में, और उनकी सन्तान देश-देश के लोगों में प्रसिद्ध होगी। जितने उन्हें देखेंगे, वे मान लेंगे कि वे यहोवा की आशीष वाली प्रजा हैं।

10 मैं यहोवा के कारण अति आनन्दित होऊँगा, मेरा मन मेरे परमेश्वर के कारण मगन होगा; क्योंकि उसने मुझे उद्धार के वस्त्र पहिनाए हैं, उसने मुझे धार्मिकता का वस्त्र ओढ़ाया है, जैसे दूल्हा अपने आप को आभूषणों से सजाता है, और दुल्हन अपने गहनों से अपना श्रृंगार करती है।

11 क्योंकि जैसे पृथ्वी अपनी उपज उगाती है, और बारी अपने में बोए गए पौधों को उगाती है, वैसे ही प्रभु परमेश्वर सब जातियों के साम्हने धार्मिकता और धन्यवाद को उगाएगा।

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