quinta-feira, 21 de novembro de 2024

मैं किंग्स 09 प्रभु दूसरी बार सुलैमान के सामने प्रकट हुए

 मैं किंग्स 09

प्रभु दूसरी बार सुलैमान के सामने प्रकट हुए


1 और ऐसा हुआ, कि जब सुलैमान यहोवा का भवन, और राजभवन, और सुलैमान की सारी इच्छा पूरी कर चुका, और वह उसे बनाना चाहता था,

2) प्रभु ने सुलैमान को फिर दर्शन दिये, जैसे उसने उसे गिबोन में दर्शन दिये थे।

3 और यहोवा ने उस से कहा, मैं ने तेरी प्रार्यना और गिड़गिड़ाहट जो तू ने मेरे साम्हने की है सुन ली है; जो भवन तू ने बनाया, उसे मैं ने इसलिये पवित्र किया है, कि उस में अपना नाम सदा के लिये रखा करूं; और मेरी आंखें और मेरा हृदय सदा वहीं बने रहेंगे।

4 और यदि तू अपके पिता दाऊद की नाईं पूरे मन और सीधाई से मेरे साम्हने चलता रहे, और जो जो आज्ञा मैं ने तुझे दी है उन सभों के अनुसार करता रहे, और मेरी विधियों और नियमों का पालन करता रहे,

5 तब मैं तेरे राज्य की गद्दी को इस्राएल पर सदा के लिये स्थिर रखूंगा, जैसा कि मैं ने तेरे पिता दाऊद के विषय में कहा, कि तुझे इस्राएल की गद्दी पर किसी पुरूष की घटी न होगी।

6 परन्तु यदि तू अपने सन्तान समेत मुझ से दूर हो जाए, और मेरी आज्ञाएं और विधियां जो मैं ने तुम्हारे साम्हने रख दी हैं उनको न मानें, और जाकर पराये देवताओं की उपासना करें, और उनको दण्डवत् करें,

7 तब मैं इस्राएल को उस देश में से जो मैं ने उनको दिया है नाश करूंगा; और इस भवन को मैं ने अपके नाम के लिथे पवित्र किया है, मैं अपके साम्हने से निकाल दूंगा; और इस्राएल सब लोगोंके बीच में एक आज्ञा और आदर्श वाक्य ठहरेगा।

8 और इस भवन से जो इतना ऊंचा है, जो कोई इसके पास से चले वह चकित हो जाएगा, और सीटी बजाकर कहेगा, यहोवा ने इस देश और इस भवन से ऐसा क्यों किया है?

9 और वे कहेंगे, क्योंकि उन्हों ने अपके परमेश्वर यहोवा को जो अपके पुरखाओंको मिस्र देश से निकाल लाया, त्याग दिया, और उनके साम्हने झुककर उनकी सेवा करते रहे, इस कारण यहोवा ने उन पर यह सब विपत्ति डाली।

10 और बीस वर्ष के बाद ऐसा हुआ, कि सुलैमान ने दोनों भवन बनवाए; यहोवा का भवन और राजा का भवन।

11) सोर के राजा हीराम ने सुलैमान की इच्छा के अनुसार उसके पास देवदार की लकड़ी, बीच की लकड़ी और सोना लाया था। तब राजा सुलैमान ने गलील देश में हीराम को बीस नगर दिये।

12 और हीराम उन नगरों को देखने के लिये सोर से निकला जो सुलैमान ने उसे दिए थे, परन्तु वे उसकी दृष्टि में अच्छे न लगे।

13 इसलिये मैं ने कहा, हे मेरे भाई, ये कौन से नगर हैं जो तू ने मुझे दिए हैं? और उन्होंने उन्हें बुलाया: काबुली की भूमि, आज तक।

14 और हीराम ने राजा के पास एक सौ बीस किक्कार सोना भेजा।

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