मैं राजा 13
एक शेर नबी को मार डालता है
11 और बेतेल में एक बूढ़ा भविष्यद्वक्ता रहता था, और उसके पुत्र ने आकर उस दिन जो कुछ परमेश्वर के भक्त ने बेतेल में किया या, और जो बातें उस ने राजा से कही थीं, उनको सब बता दिया; और उनके पिता को बता दिया।
12 और उसके पिता ने उन से पूछा, वह किस ओर गया? और उसके पुत्रों ने वह मार्ग देखा जिस से परमेश्वर का भक्त यहूदा से निकला या,
13 तब उस ने अपके पुत्रोंसे कहा, मेरे गदहे पर काठी बान्धो। और उन्होंने उसके लिये गधे पर काठी बान्धी, और वह उस पर बैठ गया।
14 और वह परमेश्वर के भक्त के पीछे गया, और उसे एक बांज वृक्ष के नीचे बैठा पाया; और उस से कहा, क्या तू परमेश्वर का भक्त है, जो यहूदा से आया है? और उसने कहा: मैं हूं.
15 तब उस ने उस से कहा, मेरे संग घर में आकर रोटी खा।
16 परन्तु उस ने कहा, मैं तेरे संग लौट नहीं सकता, और तेरे संग भीतर न जाऊंगा; मैं इस स्थान में तुम्हारे साथ न तो रोटी खाऊंगा और न पानी पीऊंगा।
17 क्योंकि यहोवा के वचन के द्वारा मुझे यह आज्ञा मिली, कि वहां न तो रोटी खाना, और न पानी पीना; और न ही तुम जिस राह पर गए थे, उसी राह पर दोबारा जाओगे।
18 और उस ने उस से कहा, मैं भी तेरे समान भविष्यद्वक्ता हूं; और एक स्वर्गदूत ने यहोवा के वचन के द्वारा मुझ से कहा, उस को अपके संग अपके घर में लौटा ले आ, कि वह रोटी खाए, और पानी पीए। (लेकिन उसने उससे झूठ बोला।)
19 और उस ने लौटकर अपके घर में रोटी खाई, और पानी पिया।
20 और ऐसा हुआ कि जब वे भोजन करने बैठे थे, तब यहोवा का सन्देश उस भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा, जो उसे लौटा लाया था।
21 और उस ने परमेश्वर के उस जन को जो यहूदा से आया या, चिल्लाकर कहा, यहोवा यों कहता है, कि तू ने यहोवा के मुख से बलवा किया है, और जो आज्ञा तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे दी थी उसको नहीं माना;
22 परन्तु तू ने उसी स्यान में लौटकर रोटी खाई, और पानी पिया है, जहां मैं ने तुझ से कहा था, कि तू न रोटी खाना, और न पानी पीना; तुम्हारी लोथ तुम्हारे पुरखाओं की कब्र में प्रवेश न करेगी।
23 और ऐसा हुआ कि जब वह रोटी खा चुका, और पी चुका, तब उस भविष्यद्वक्ता के लिये जिसे वह लौटा ले आया या, उस ने गदहे पर काठी बान्धी।
24 तब वह चला, और मार्ग में एक सिंह उसे मिला, और उसे मार डाला; और उसकी लोय मार्ग में फेंक दी गई, और गदहा उसके पास खड़ा रहा, और सिंह लोथ के पास खड़ा रहा।
25 और देखो, वे लोग उधर से गुजर रहे थे, और मार्ग में एक लोय को पड़ा हुआ, और उसके पास सिंह को खड़ा हुआ देखा; और जिस नगर में बूढ़ा भविष्यद्वक्ता रहता या, उस में आकर इसका समाचार सुनाया।
26 और उस भविष्यद्वक्ता ने जो उसे मार्ग से लौटा ले आया या, उस ने यह सुनकर कहा, यह वही परमेश्वर का जन है, जिस ने यहोवा से बलवा किया है; इस कारण यहोवा ने उसे सिंह के हाथ में कर दिया, और उस वचन के अनुसार जो यहोवा ने उस से कहा था, उस ने उसे फाड़कर मार डाला।
27 तब उस ने अपके पुत्रोंसे कहा, मेरे लिथे गदहे पर काठी बान्धो। उन्होंने उस पर काठी डाल दी.
28 तब उस ने जाकर उसकी लोय मार्ग पर पड़ी हुई पाई, और गदहे और सिंह को लोय के पास खड़े देखा; सिंह ने न लोय को खाया, और न गदहे को फाड़ डाला।
29 तब भविष्यद्वक्ता ने परमेश्वर के भक्त की लोय को उठाकर गदहे पर रखा, और फिर ले चला; तब बूढ़ा भविष्यद्वक्ता विलाप करने और उसे मिट्टी देने को नगर में आया।
30 और उस ने उसका शव अपक्की ही कब्र में रख दिया; और उन्होंने यह कहते हुए उसके लिये शोक मनाया: हाय! मेरा भाई!
31 और उसको मिट्टी देने के बाद उस ने अपके बेटोंसे कहा, जब मैं मर जाऊं, तब मुझे उस कब्र में मिट्टी देना, जिस में परमेश्वर का भक्त गाड़ा गया है; और उसकी हड्डियोंके साय मेरी हड्डियां भी रखना।
32 क्योंकि उस ने बेतेल की वेदी, और शोमरोन के नगरोंके ऊंचे स्थानोंके सब भवनोंके विरूद्ध यहोवा के वचन के द्वारा जो दोहाई दी, वह निश्चय पूरी होगी।
33 इन बातों के बाद यारोबाम अपनी बुरी चाल से न फिरा; उसने सबसे छोटे लोगों के सामने फिर से ऊंचे स्थानों का याजक बनाया; जिसे वह चाहता था, उस का हाथ भर देता था, और इस प्रकार वह ऊंचे स्थानों के याजकों में से एक हो गया।
34 और इस से यारोबाम के घराने ने पाप करवाया, और उसको देश में से नाश किया।
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