मैं राजा 12
यारोबाम की मूर्तिपूजा
26 और यारोबाम ने मन में कहा, अब वह राज्य को दाऊद के घराने को लौटा देगा।
27 यदि ये लोग यरूशलेम में यहोवा के भवन में बलिदान करने को जाएं, तो इन लोगों का मन अपके स्वामी अर्यात् यहूदा के राजा रहूबियाम की ओर फिरे।
28 तब राजा ने सम्मति करके सोने के दो बछड़े बनवाए; और उन से कहा, तुम को यरूशलेम तक जाना बहुत कठिन होगा; हे इस्राएल, अपने देवताओं को यहां देख, जो तुम्हें मिस्र देश से निकाल ले आए।
29 और उस ने एक को बेतेल में, और दूसरे को दान में रखा।
30- और यह काम पाप हो गया; क्योंकि लोग दण्डवत् करने को दान को गए।
31 और उस ने ऊंचे स्थानोंके लिथे भवन भी बनाया: और उस ने छोटे लोगोंमें से याजक नियुक्त किए, जो लेवी की सन्तान में से न थे।
32 और यारोबाम ने आठवें महीने के पन्द्रहवें दिन को यहूदा में माने जाने वाले पर्व के समान एक जेवनार की, और वेदी पर बलि चढ़ाया; वैसे ही उस ने बेतेल में भी अपने बनाए हुए बछड़ों को बलि करके किया; बेतेल में उस ने ऊंचे स्थानोंके लिथे याजक नियुक्त किए, जैसा उस ने किया या।
33 और उस ने उस वेदी पर जो उस ने बेतेल में बनाई या, आठवें महीने के पन्द्रहवें दिन को, जिस महीने की उस ने अपके मन में कल्पना की यी, बलिदान किया; इस प्रकार उस ने इस्राएलियोंके लिथे पर्ब्ब किया, और बलिदान किया वेदी, जलती धूप.
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