sexta-feira, 22 de novembro de 2024

मैं राजा 10 शीबा की रानी सुलैमान से मिलने आती है

 मैं राजा 10

शीबा की रानी सुलैमान से मिलने आती है


1 और जब शेबा की रानी ने यहोवा के नाम के विषय में सुलैमान की कीर्ति सुनी, तब वह पहेलियों से उसे परखने को आई।

2 और वह बहुत बड़ी सेना लेकर यरूशलेम को आया; मसालों, और बहुत सोने और बहुमूल्य पत्थरों से लदे हुए ऊंटों के साथ; और वह सुलैमान के पास आया, और अपने मन का सब कुछ उस से कह सुनाया।

3 और सुलैमान ने अपक्की सारी बातें उस को बता दीं; कोई बात राजा से छिपी न रही, जो उस ने उसे न बताई हो।

4 जब शीबा की रानी ने सुलैमान की सारी बुद्धि और उसका बनाया हुआ भवन देखा,

5 और उसकी मेज का भोजन, और उसके दासोंके बैठने की स्यान, और उसके दासोंके बैठने की जगह, और उनके वस्त्र, और उसके पिलानेहारे, और उसकी चढ़ाई, जिस से वह यहोवा के भवन को जाता था, वहां कोई न रहा। उसमें और अधिक जोश है.

6 और उस ने राजा से कहा, जो वचन मैं ने अपके देश में तेरे कामोंऔर तेरी बुद्धि के विषय में सुना, वह सच है।

7 और जब तक मैं न आया, और अपनी आंखों से उसे न देखा, तब तक मैं ने उन बातोंकी प्रतीति न की; देखो, उन्होंने आधा भी नहीं कहा; जो यश मैंने सुना था, उससे भी अधिक तू बुद्धि और धन में बढ़ गया।

8-धन्य हैं तेरे पुरूष, धन्य हैं तेरे दास, जो सदैव तेरे सम्मुख रहते हैं, और तेरी बुद्धि सुनते हैं!

9 तेरा परमेश्वर यहोवा धन्य है, जो तुझ से प्रसन्न हुआ, और तुझे इस्राएल की गद्दी पर बिठाया; क्योंकि यहोवा इस्राएल से सदा प्रेम रखता है, इस कारण उस ने तुझे न्याय और न्याय करने के लिथे राजा बनाया है।

10 और उस ने राजा को एक सौ बीस किक्कार सोना, और बहुत सा सुगन्धद्रव्य, और मणि दिया; सुगन्धद्रव्य कभी इतनी बहुतायत में न आया, जितना शेबा की रानी ने राजा सुलैमान को दिया।

11 और हीराम के जहाज, जो ओपीर से सोना लाते थे, ओपीर से बहुत सी अलमुग की लकड़ी, और बहुमूल्य पत्थर भी लाते थे।

12 और राजा ने इस लकड़ी के यहोवा के भवन और राजभवन के लिथे गुच्छे, और गवैयोंके लिथे वीणाएं और सारंगियां बनवाईं; ऐसी लकड़ी न तो आज के दिन तक बनी, और न कभी देखी गई है।

13 और शीबा की रानी को राजा सुलैमान ने वह सब दिया जो वह उस से चाहती थी, और जो कुछ उस ने उसको दिया या, वह राजा सुलैमान के बड़े होने के अनुसार दिया गया; तब वह अपने सेवकोंसमेत लौटकर अपने देश को चली गई।

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