sábado, 14 de janeiro de 2023

 मैं राजा 3 सुलैमान दो स्त्रियों का न्याय करता है

 मैं राजा 3

सुलैमान दो स्त्रियों का न्याय करता है

16 तब दो वेश्याएं राजा के पास आकर उसके साम्हने खड़ी हुई।
17 और स्त्रियों में से एक ने उस से कहा, आह! हे मेरे प्रभु, यह स्त्री और मैं एक घर में रहते हैं; और मेरा एक बेटा था, जो उस घर में उसके साथ रहता था।
18 और मेरे जनने के तीसरे दिन ऐसा हुआ, कि इस स्त्री के भी एक पुत्र उत्पन्न हुआ;
19 और उस स्त्री का बेटा रात ही में मर गया, क्योंकि वह उस पर लेटी यी।
20 और वह आधी रात को उठी, और जब तेरी दासी सो रही यी, तब उस ने मेरे पुत्र को मेरे पास से लेके मेरी गोद में लिटा दिया।
21 बिहान को जब मैं अपके बालक को दूध पिलाने को उठी, तब क्या देखता है, कि वह मर गया है; परन्तु भोर को जब मैं ने उस पर दृष्टि की, तो क्या देखा, कि मेरा बेटा नहीं या।
22 फिर उस ने दूसरी स्त्री से कहा, नहीं, मेरा पुत्र जीवित है, और तेरा पुत्र मरा हुआ है। उसने कहा, नहीं, निश्चय मरा हुआ तेरा पुत्र है, और जीवित मेरा पुत्र है: सो वे राजा के साम्हने बातें करने लगीं।
23 राजा ने कहा, यह तो कहता है, कि जो जीवित पुत्र है वह मेरा है, और मरा तेरा पुत्र है; और यह दूसरा कहता है, नहीं, सचमुच; मरा हुआ तेरा पुत्र है और मेरा पुत्र जीवित है।
24 राजा ने कहा, तलवार मेरे पास ले आ? और वे तलवार राजा के साम्हने ले आए।
25 और राजा ने कहा, जीवित बालक को दो भाग करके आधा उसको, और आधा उसको दो।
26 परन्तु जिस स्त्री का बेटा जीवित या, उस स्त्री ने राजा से कहा, उसका मन बेटे के लिथे तरस रहा या, और कहा, आह! हे मेरे प्रभु, जीवित बालक उसे दे, और उसे किसी रीति से न मार। लेकिन दूसरे ने कहा: न तेरा हो न मेरा; मैंने इसे पहले साझा किया था।
27 राजा ने उत्तर देकर कहा, जीवित बालक उसी को दे दो, और उसे किसी रीति से न मारो, क्योंकि उसकी माता यही है।
28 और सब इस्राएल ने राजा का न्याय सुना, और राजा से डर गए, क्योंकि उन्होंने देखा कि न्याय करने के लिथे उसमें परमेश्वर की बुद्धि है।

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