quarta-feira, 28 de dezembro de 2022

 द्वितीय शमूएल 24 लोगों की संख्या और परमेश्वर द्वारा भेजा गया दंड

 द्वितीय शमूएल 24

लोगों की संख्या और परमेश्वर द्वारा भेजा गया दंड

1 तब यहोवा का कोप इस्राएलियों पर फिर भड़क उठा, और उस ने दाऊद को उनके विरुद्ध उभारा, और कहा, जा, इस्राएल और यहूदा को गिन ले।
2 तब राजा ने योआब नाम सेनापति से, जो उसके पास या, कहा, अब दान से लेकर बेर्शेबा तक इस्राएल के सब गोत्रोंमें घूमकर प्रजा की गिनती ले, कि मैं प्रजा की गिनती जान लूं।
3 तब योआब ने राजा से कहा, तेरा परमेश्वर यहोवा उन प्रजा के लोगोंको अब सौ गुणा बढ़ाए, और मेरा प्रभु राजा इसे अपनी आंखोंसे देखने भी पाए; परन्तु मेरा प्रभु राजा यह बात क्यों चाहता है?
4 परन्तु राजा की आज्ञा योआब और सेनापतियोंपर प्रबल हुई, अर्यात् योआब सेनापतियोंसमेत राजा के आगे आगे इस्त्राएलियोंकी गिनती लेने को निकला।
5 और वे यरदन पार हो गए, और अरोएर के पास के नगर की दाहिनी ओर के मैदान में, जो गाद नाले के बीच में है, और याजेर के पास खड़े हुए।
6 और वे गिलाद और होदसी के निचले देश में आए, और दंजान और सीदोन के चारों ओर गए।
7 और वे सोर के गढ़, और हैहियोंऔर कनानियोंके सब नगरोंमें गए, और यहूदा की दक्खिन अलंग से बेर्शेबा तक गए।
8 और वे सारे देश में घूमे, और नौ महीने बीस दिन के बीतने पर यरूशलेम को लौटे।
9 तब योआब ने प्रजा की गिनती का जोड़ राजा को दिया, और तलवार चलानेवाले इस्राएली तो आठ लाख थे; और यहूदा के लोग पांच लाख पुरुष थे।
10 प्रजा की गिनती लेने के बाद दाऊद का मन पछताया; और दाऊद ने यहोवा से कहा, यह काम मैं ने बहुत पाप किया है; क्योंकि मैंने बड़ी मूर्खता की है।
11 बिहान को जब दाऊद उठा, तब यहोवा का यह वचन गाद नाम नबी के पास जो दाऊद का दशीं या, पहुंचा,
12 जाकर दाऊद से कह, यहोवा योंकहता है, कि मैं तुझ को तीन विपत्तियां दिखाता हूं; उनमें से एक चुनें, ताकि आप इसे कर सकें।
13 तब गाद ने दाऊद के पास जाकर उसको समाचार दिया; और उस से कहा, क्या तू चाहता है कि तेरे देश में सात वर्ष का अकाल पके; वा तीन महीने तक तू अपके शत्रुओं से भागता रहे, और वे तेरा पीछा करें; वा तेरे देश में तीन दिन तक मरी फैली रहे? अब निर्णय करो, और देखो, मैं अपके भेजनेवाले को क्या उत्तर देता हूं।
14 तब दाऊद ने गाद से कहा, मैं बड़े संकट में हूं; परन्तु आओ, हम यहोवा के हाथ में पड़ें, क्योंकि उसकी दया बहुत है; परन्तु मनुष्य के हाथ में नहीं पड़ता।
15 तब यहोवा इस्राएलियोंमें बिहान से ले ठहराए हुए समय तक मरी भेजता रहा, और दान से लेकर बेर्शेबा तक प्रजा के सत्तर हजार पुरूष मर गए।
16 जब दूत ने यरूशलेम का नाश करने के लिथे उस पर हाथ बढ़ाया, तब यहोवा विपत्ति के विषय में पछताया; और उस ने प्रजा को नाश करनेवाले दूत से कहा, बस हो गया, अब अपना हाथ खींच ले। और यहोवा का दूत यबूसी अरौना के खलिहान के पास था।
17 जब प्रजा के नाश करनेवाले दूत को दाऊद ने देखा, तब उस ने यहोवा से कहा, सुन, पाप तो मैं ही ने किया, और कुटिल काम मैं ही ने किया है; परन्तु इन भेड़ों ने क्या किया है? तेरा हाथ मेरे और मेरे पिता के घराने के विरुद्ध हो।
18 उसी दिन गाद ने दाऊद के पास जा कर उस से कहा, जा कर यबूसी अरौना के खलिहान में यहोवा की एक वेदी बनवा।
19 यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार दाऊद गाद के कहने के अनुसार ऊपर चढ़ा।
20 और अरौना ने दृष्टि करके राजा को अपके कर्मचारियोंसमेत अपनी ओर आते देखा; तब अरौना ने बाहर जाकर भूमि पर मुंह के बल राजा को दणडवत की।
21 अरौना ने कहा, मेरा प्रभु राजा अपके दास के पास क्योंआता है? और दाऊद ने कहा, यह खलिहान तुम से मोल लेने, और उस पर यहोवा की एक वेदी बनाने के लिथे, जिस से प्रजा पर से यह दण्ड दूर हो जाए।
22 अरौना ने दाऊद से कहा, मेरा प्रभु राजा जो कुछ उसको अच्छा लगे वही लेकर चढ़ाए; अर्यात् होमबलि के लिथे तो बैल हैं, और लकड़ी के लिथे दावनी और बैलोंका सामान है।
23 ये सब अरौना ने राजा को दिया, और अरौना ने राजा से कहा, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से प्रसन्न रहे।
24 परन्तु राजा ने अरौना से कहा, मैं उसको दाम देकर न लूंगा, क्योंकि मैं अपके परमेश्वर यहोवा के लिथे बिना दाम का होमबलि न चढ़ाऊंगा। तब दाऊद ने खलिहान और बैलों को चांदी के पचास शेकेल में मोल लिया।
25 वहां दाऊद ने यहोवा की एक वेदी बनाकर होमबलि और मेलबलि चढ़ाए। इस प्रकार यहोवा भूमि से प्रसन्न हुआ, और इस्राएल का दण्ड बन्द हो गया।

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