sábado, 3 de dezembro de 2022

द्वितीय शमूएल 19 बर्जिल्लै दाऊद से मिलता है

 द्वितीय शमूएल 19


बर्जिल्लै दाऊद से मिलता है


31 फिर गिलादी बर्जिल्लै रोगलीम से चला, और राजा के संग यरदन पार गया, कि उसके पीछे यरदन के पार चला जाए।

32 और बर्जिल्लै बहुत बूढ़ा और अस्सी वर्ष का या; और जब वह महनैम में रहता या, तब उस ने उसकी सहायता की, क्योंकि वह अति प्रतापी पुरूष या।

33 और राजा ने बर्जिल्लै से कहा, तू मेरे संग चल, और मैं यरूशलेम में अपके साय तुझे सम्भालूंगा।

34 परन्तु बर्जिल्लै ने राजा से कहा, मैं अपने जीवन के कितने दिनों तक राजा के संग यरूशलेम को जाता रहूँगा?

35 मैं आज अस्सी वर्ष का हूं; क्या मैं अच्छे और बुरे के बीच भेद कर सकता था? क्या तेरा दास खाने-पीने का स्वाद चख सकता है? क्या मैं अब पुरुष और महिला गायकों की आवाज़ सुन सकता हूँ? और तेरा दास अब तक मेरे प्रभु राजा पर क्यों बोझ बना रहेगा?

36 तेरा दास राजा के संग यरदन पार थोड़ा ही आगे जाएगा, फिर राजा मुझ को ऐसा बदला क्यों देगा?

37 तेरा दास लौट आए, और वह मेरे नगर में मेरे माता पिता के कब्रिस्तान में मर जाए। मेरे प्रभु राजा को जाने दे, और जो तेरी दृष्टि में अच्छा लगे वही उसके साय कर।

38 तब राजा ने कहा, किम्हाम मेरे साय पार जाएगा, और जो कुछ तुझे भाए वही मैं उसके साय करूंगा, और जो कुछ तू मुझ से मांगेगा वही मैं तेरे लिथे करूंगा।

39 जब सब लोग यरदन के पार उतर गए, और राजा भी पार हो गया, तब राजा ने बर्जिल्लै को चूमा, और उसको आशीर्वाद दिया, और वह अपके स्यान को लौट गया।

40 वहां से राजा गिलगाल की ओर गया, और किमाम उसके संग पार गया; और सब यहूदी और आधे इस्राएली राजा की अगुवाई करने लगे।

41 तब सब इस्राएली पुरूष राजा के पास आकर राजा से कहने लगे, हमारे यहूदी भाइयोंने तुझे क्यों लूटा, और दाऊद के सब पुरूषोंसमेत राजा को उसके भवन में यरदन के पार पहुंचा दिया? ? ?

42 तब सब यहूदी पुरुषोंने इस्राएली पुरूषोंको उत्तर दिया, कि राजा हमारा कुटुम्बी है; और तुम इस पर क्रोधित क्यों हो? क्या हमने राजा के खर्चे पर खाना खाया, या उसने हमें उपहार दिया?

43 इस्राएली पुरूषों ने यहूदा के पुरूषों को उत्तर देकर कहा, राजा के पास हमारा दस भाग है, और दाऊद के विषय में भी तुझ से अधिक है; फिर तू ने हमें क्यों तुच्छ समझा, कि हमारा वचन पहिला न हो, कि हमारे राजा को लौटा ले आए? परन्तु यहूदा के पुरुषों की बातें इस्राएलियों की बातों से अधिक प्रबल थीं।

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