द्वितीय शमूएल 19
डेविड यरूशलेम लौट आया
11 तब दाऊद राजा ने सादोक और एब्यातार नाम याजकोंके पास कहला भेजा, कि यहूदा के पुरनियोंसे कह, कि राजा को उसके भवन में लाने में तुम सब से सब से पीछे क्योंहोना? (क्योंकि सारे इस्राएल की बातें राजा तक, यहां तक कि उसके भवन तक भी पहुंची।)
12 तुम तो मेरे भाई, और मेरी हडि्डयां और मांस हो; फिर तुम राजा को लौटा लाने में सब से पीछे क्योंहोना?
13 और अमासा से कहना, क्या तू मेरी हड्डी और मांस नहीं है? यदि तू योआब की सन्ती मेरे सम्मुख छावनी का प्रधान न बना रहे, तो परमेश्वर मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे।
14 तब उस ने सब यहूदी पुरूषोंका मन एक मन सा कर दिया; और उन्होंने राजा के पास कहला भेजा, कि अपके सब कर्मचारियोंसमेत लौट आ।
15 तब राजा लौटकर यरदन के पास आया; और यहूदा गिलगाल से राजा से भेंट करने के लिथे यरदन के पार आया।
16 तब शिमी जो बहरीमवासी या, और जेमिनी का पोता, और यहूदी पुरूषोंसमेत दाऊद राजा से भेंट करने को फुर्ती से गया।
17 और उसके साथ एक हजार बिन्यामीनी पुरूष, और शाऊल के घराने का कर्मचारी सीबा, और उसके पन्द्रह पुत्र, और उसके साथ बीस सेवक; और वे तुरन्त राजा के साम्हने यरदन पार हो गए।
18 और जब नाव राजा के भवन के पार जाने, और जो उसे भाता या उस काम को करने के लिथे उसके पास से गुजरती, तब जेरा के पुत्र शिमी ने यरदन पार होकर राजा को दण्डवत् किया।
19 और राजा ने कहा, मेरा प्रभु मेरे अधर्म का दोष मेरे ऊपर न मढ़ने पाए, और यह स्मरण न रहे कि जिस दिन मेरा प्रभु राजा यरूशलेम से निकला उस समय तेरे दास ने ऐसी दुष्टता की थी; राजा को अपने दिल में मत रखो।
20 क्योंकि तेरा दास निश्चय मान लेता है कि मैं ने पाप किया है: तौभी देख, अपके प्रभु राजा से भेंट करने के लिथे यूसुफ के सारे घराने में मैं ही पहिला हूं।
21 तब सरूयाह के पुत्र अबीशै ने कहा, क्या शिमी यहोवा के अभिषिक्त को शाप देने के कारण इस कारण मार डाला न जाएगा?
22 दाऊद ने कहा, हे सरूयाह के पुत्रों, मुझे तुम से क्या काम, कि तुम आज मेरे बैरी हो? क्या आज इज़राइल में कोई मरेगा? मैं क्यों नहीं जानता कि आज मुझे इस्राएल का राजा बनाया गया है?
23 और राजा ने शिमी से कहा, तू न मरेगा। और राजा ने उससे शपथ खाई।
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