segunda-feira, 15 de novembro de 2021

1 शमूएल 31 इस्राएलियों का वध और शाऊल की मृत्यु

 1 शमूएल 31

इस्राएलियों का वध और शाऊल की मृत्यु

1 तब पलिश्ती इस्राएल से लड़ने लगे, और इस्राएली पुरूष पलिश्तियोंके साम्हने से भागे, और गिलबो नाम पहाड़ पर गिर पड़े।

2 और पलिश्तियोंने शाऊल और उसके पुत्रोंके संग यत्न किया, और पलिश्तियोंने योनातान, अबीनादाब और शाऊल के पुत्र मल्कीशू को मार डाला।

3 और शाऊल से युद्ध छिड़ गया, और धनुर्धारियोंने उसे पकड़ लिया; और धनुर्धारियों के कारण बहुत डरते थे।

4 तब शाऊल ने अपके पृष्ठ से कहा, अपक्की तलवार तोड़कर मुझे बेध दे, कहीं ऐसा न हो कि वे खतनारहित आकर मुझे बेधें, और मेरा उपहास करें। परन्‍तु उसका पन्‍ना हाथ में नहीं पड़ा, क्‍योंकि वह बहुत डरता था; तब शाऊल तलवार लेकर उस पर गिर पड़ा।

5 जब उसके हाथ में पन्ने ने देखा, कि शाऊल मारा गया है, तब वह भी अपक्की तलवार पर गिर पड़ा, और उसके संग मर गया।

6 इस प्रकार शाऊल और उसके तीन पुत्र, और उसका पन्ना हाथ में लिये हुए, और उसके सब जन भी उसी दिन एक संग मर गए।

7 और जब इस्राएली पुरूष जो तराई की इस पार और यरदन की इस पार रहते थे, यह देखकर कि इस्राएली भाग गए, और शाऊल और उसके पुत्र मर गए, तब वे नगरोंको छोड़कर भाग गए; और पलिश्ती आकर उन में रहने लगे।

8 और दूसरे दिन जब पलिश्ती मारे हुओं को लूटने को आए, तब उन्होंने शाऊल और उसके तीनोंपुत्रोंको गिलबो के पहाड़ पर पड़ा पाया।

9 और उन्होंने उसका सिर काट डाला, और उसके हथियार छीन लिए, और पलिश्तियोंके देश के चारोंओर उसे अपक्की मूरतोंके भवन और प्रजा के बीच प्रचार करने को भेज दिया।

10 और उन्होंने अश्तारोत के मन्दिर में अपने हथियार रखे, और उसकी लोय को बेतसान की शहरपनाह पर लगा दिया।

11 जब गिलाद के याबेश के निवासियों ने यह सुना, कि पलिश्तियोंने शाऊल से क्या किया,

12 और सब शूरवीर उठकर रात भर चले, और शाऊल की लोथ और उसके पुत्रोंकी लोथोंको बेतसान की शहरपनाह पर से उठा ले गए, और याबेश में पहुंचकर उसे फूंक दिया।

13 और उन्होंने उसकी हड्डियोंको लेकर याबेश में एक अहाते के तले मिट्टी दी, और सात दिन तक उपवास किया।

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