terça-feira, 3 de setembro de 2019

व्यवस्थाविवरण १६ न्यायाधीशों के कर्तव्य

व्यवस्थाविवरण १६
न्यायाधीशों के कर्तव्य
18 न्यायाधीशों और अधिकारियों को आप अपने सभी द्वारों में डालेंगे जो आपके परमेश्वर यहोवा ने आपको अपने गोत्रों में से दे सकते हैं, कि वे लोगों को एक न्यायी न्याय दे सकते हैं।
19 तू न्याय नहीं करेगा, और न ही लोगों के प्रति आदर दिखाएगा और न ही रिश्वत लेगा; क्योंकि रिश्वत बुद्धिमानों की आँखों को अंधा कर देता है, और धर्मी के शब्दों को नष्ट कर देता है।
20 धार्मिकता, धार्मिकता का आप अनुसरण करेंगे; कि तुम जीवित रह सकते हो, और उस भूमि को प्राप्त करोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें देगा।
21 तुम अपने परमेश्वर यहोवा की वेदी के द्वारा वृक्षों का कोई भी उपवन नहीं लगाओगे जो तुम अपने लिए बनाते हो।
22 न तो तुम एक प्रतिमा को उठाओ, जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर है।

Nenhum comentário:

Postar um comentário