व्यवस्थाविवरण १६
न्यायाधीशों के कर्तव्य
18 न्यायाधीशों और अधिकारियों को आप अपने सभी द्वारों में डालेंगे जो आपके परमेश्वर यहोवा ने आपको अपने गोत्रों में से दे सकते हैं, कि वे लोगों को एक न्यायी न्याय दे सकते हैं।
19 तू न्याय नहीं करेगा, और न ही लोगों के प्रति आदर दिखाएगा और न ही रिश्वत लेगा; क्योंकि रिश्वत बुद्धिमानों की आँखों को अंधा कर देता है, और धर्मी के शब्दों को नष्ट कर देता है।
20 धार्मिकता, धार्मिकता का आप अनुसरण करेंगे; कि तुम जीवित रह सकते हो, और उस भूमि को प्राप्त करोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें देगा।
21 तुम अपने परमेश्वर यहोवा की वेदी के द्वारा वृक्षों का कोई भी उपवन नहीं लगाओगे जो तुम अपने लिए बनाते हो।
22 न तो तुम एक प्रतिमा को उठाओ, जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर है।
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