व्यवस्थाविवरण ३१
मूसा ने अपने उत्तराधिकारी का नाम जोशुआ रखा
1 और मूसा ने इन शब्दों को पूरे इज़राइल को सुनाया।
2 और उस ने उन से कहा, मैं इस दिन सौ और बीस वर्ष का हूं: मैं अब बाहर नहीं जा सकूंगा और भीतर आ जाऊंगा: और यहोवा ने मुझ से कहा, तू यरदन के पार नहीं जाएगा।
3 तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे सामने से गुजरेगा; जैसा कि यहोवा ने कहा था, वह तुम्हारे सामने इन राष्ट्रों को नष्ट कर देगा, कि तुम उनके पास हो सकते हो।
4 और यहोवा उनके साथ वैसा ही करेगा जैसा उसने सीहोन और ओग, अमोरियों के राजाओं और उनकी भूमि पर किया था, जिसे उसने नष्ट कर दिया था।
5 जब यहोवा उन्हें तुम्हारे सामने देता है, तो तुम उसके साथ उन सभी आज्ञाओं के अनुसार करोगे जो मैंने तुम्हें आज्ञा दी है।
6 कड़ी मेहनत करें और प्रोत्साहित हों; डरो मत, और न ही उनसे डरो: क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे साथ जा रहा है; यह न तो आपको छोड़ेगा और न ही आपको त्याग देगा।
7 और मूसा ने यहोशू को बुलाया, और उस से कहा कि वह सब इस्राएलियों की दृष्टि में, बलवान और उज्ज्वल हो; इस देश के लोगों के साथ आप उस देश में प्रवेश करेंगे जिसे देने के लिए प्रभु ने आपके पिताओं को शपथ दिलाई है। और तुम उन्हें उसका वारिस बना दोगे,
8 यहोवा वही है जो तुम्हारे सामने जाता है: वह तुम्हारे साथ रहेगा, न तुम्हें छोड़ेगा और न तुम्हें त्याग देगा; डरो या मत डरो।
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