segunda-feira, 28 de novembro de 2022

द्वितीय शमूएल 18 दाऊद, अबशालोम की मृत्यु के बारे में सुनकर फूट-फूट कर रोया

 द्वितीय शमूएल 18

दाऊद, अबशालोम की मृत्यु के बारे में सुनकर फूट-फूट कर रोया

19 तब सादोक के पुत्र अहीमास ने कहा, मुझे दौड़ जाने दे, और मैं राजा से कहूंगा, कि यहोवा ने उसके शत्रुओं के हाथ का पलटा लिया है।

20 योआब ने उस से कहा, आज तो तू शुभ समाचार देने न पाएगा, परन्तु दूसरे दिन सुनाना; परन्तु आज समाचार न देना, क्योंकि राजकुमार मर गया है।

21 योआब ने कूशी से कहा, जो कुछ तू ने देखा है वह जाकर राजा को बता। और कूशी योआब को दण्डवत् करके दौड़ा।

22 और सादोक के पुत्र अहीमास ने जाकर योआब से कहा, जो कुछ हो, मुझे भी कूशी के पीछे दौड़ जाने दे। योआब ने कहा, हे मेरे पुत्र, अब तू क्योंभागता है, क्योंकि तेरे पास कोई उचित सन्देश नहीं है?

23 अहीमास ने कहा, जो कुछ हो सो हो, मैं दौड़ूंगा। योआब ने उस से कहा, भाग जा। और अहीमास मैदान के मार्ग से दौड़ा, और कूशी को पहुंचा।

24 और दाऊद दोनोंफाटकोंके बीच में बैठा या; और पहरुए फाटक की छत पर शहरपनाह के पास चढ़ गया; और उस ने आंखें उठाकर क्या देखा, कि एक पुरूष अकेला दौड़ा आता है।

25 तब पहरूए ने चिल्लाकर राजा से कहा, यदि वह अकेला आता है, तो उसके मुंह से समाचार मिलेगा। और यह चल रहा था और आ रहा था।

26 फिर पहरूए ने एक और मनुष्य को दौड़ता हुआ देखा, और पहरूए ने द्वारपाल को बुलाकर कहा, सुन, एक और मनुष्य अकेला दौड़ा आता है। तब राजा ने कहा, यह भी समाचार लाता है।

27 और पहरूए ने कहा, पहिले का दौड़ना मुझे सादोक के पुत्र अहीमास का सा जान पड़ता है। तब राजा ने कहा, यह भला मनुष्य है, और तू शुभ समाचार लेकर आएगा।

28 तब अहीमास ने पुकार के राजा से कहा, शान्‍ति। और उस ने भूमि पर मुंह के बल राजा को दण्डवत् करके कहा, यहोवा धन्य है, जिस ने उन पुरूषोंके हाथ पकड़वा दिया है जिन्होंने मेरे प्रभु राजा के विरूद्ध हाथ उठाया या।

29 तब राजा ने पूछा, क्या वह जवान अबशालोम से कुशल से है? अहीमास ने कहा, जब योआब ने राजा के कर्मचारी को और मुझ तेरे दास को भेजा, तब मैं ने बड़ी हुल्लड़ देखी; लेकिन मुझे नहीं पता कि वह क्या था।

30 राजा ने कहा, मुड़कर यहां खड़ा हो। और मुड़ा, और रुक गया।

31 तब कूशी आया, और कूशी ने कहा, हे मेरे प्रभु राजा को यह समाचार मिलेगा, कि यहोवा ने आज के दिन उन सभोंसे जो तेरे विरूद्ध उठे थे तेरा पलटा लिया है।

32 तब राजा ने कूशी से पूछा, क्या वह जवान अबशालोम से कुशल से है? कूशी ने कहा, मेरे प्रभु राजा के शत्रु उस जवान पुरूष के समान हों, और वे सब जो तेरी हानि करने को उठ खड़े हुए हों।

33 तब राजा घबरा गया, और द्वार के ऊपर वाली कोठरी में जाकर रो पड़ा; और चलते चलते उस ने योंकहा, हे मेरे पुत्र अबशालोम, हे मेरे पुत्र, हे मेरे पुत्र, हे मेरे पुत्र, अबशालोम! काश मैं तुम्हारे लिए मर जाता, अबशालोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे!

Nenhum comentário:

Postar um comentário