sábado, 26 de novembro de 2022

द्वितीय शमूएल 17

 द्वितीय शमूएल 17

1 अखतोफेल ने अबशालोम से कहा, मुझे बारह हजार पुरूष चुन लेने दे, और मैं उसी रात को उठकर दाऊद के पीछे पीछे हो लूंगा।

2 और मैं उस पर चढ़ाई करूंगा, क्योंकि वह थका हुआ और मेरे हाथोंसे कमजोर हो गया है; और मैं उसको डरा दूंगा, और जितने लोग उसके संग हैं वे सब भाग जाएंगे; और तब मैं अकेले राजा को मारूंगा।

3 और मैं सब लोगोंको तेरे पास फेर ले आऊंगा, क्योंकि जिसको तू ढूंढ़ता है वह सब हो जाता है; तब सब लोग शान्ति से रहेंगे।

4 यह बात अबशालोम को, और इस्राएल के सब वृद्ध लोगोंको अच्छी जान पड़ी।

5 अबशालोम ने कहा, एरेकी हूशै को भी बुला ले, और हम भी सुनें, कि वह क्या कहेगा।

6 जब हूशै अबशालोम के पास आया, तब अबशालोम ने उस से कहा, अहीतोपेल ने योंकहा, क्या हम उसके कहने के अनुसार करें?

नहीं तो आप बोलिए।

7 तब हूशै ने अबशालोम से कहा, जो सम्मति अहीतोफेल ने इस बार दी वह अच्छी नहीं।

8 हूशै ने कहा, अपके पिता और उसके जनोंको तो तू जानता है, कि वे शूरवीर हैं, और उनका मन दु:खी है, जैसा मैदान में भालू, जो कुत्तोंसे चुराया जाता है; लोगों के साथ रात नहीं गुजारेंगे।

9 देख, वह अब किसी गड़हे या किसी और स्थान में छिपा है; .

10 तब वीर का भी ह्रृदय सिंह का सा हो जाता है, वह निश्चय ही मूर्छित हो जाएगा; क्योंकि समस्त इस्राएल जानता है कि तेरा पिता शूरवीर है, और उसके संगी शूरवीर हैं।

11 परन्तु मेरी सम्मति यह है कि दान से लेकर बेर्शेबा तक के सारे इस्राएली समुद्र की बालू के किनकोंके समान फुर्ती करके तेरे पास इकट्ठे किए जाएं, और तू आप ही युद्ध को जाए।

12 तब हम उसके पास जाएंगे, जहां कहीं वह मिले, और ओस की नाईं पृय्वी पर गिरे हुए की नाईं उस पर टूट पड़ेंगे; और उसका और उसके संग के सब मनुष्योंमें से एक भी न रहेगा।

13 और यदि वह किसी नगर को निकल जाए, तो सब इस्राएली उस नगर में रस्सियां ​​ले आएंगे, और हम उसको नाले तक खींच कर ले जाएंगे, यहां तक ​​कि उस में एक पत्थर भी न मिलेगा।

14 तब अबशालोम और सब इस्राएली पुरूष कहने लगे, अर्की हूशै की सम्मति अखितोफेल की सम्मति से उत्तम है (परन्तु यहोवा ने यही आज्ञा दी यी, कि अखतोफेल की अच्छी सम्मति को उलट दे, जिस से यहोवा अबशालोम पर विपत्ति डाले।)

15 तब हूशै ने सादोक और एब्यातार याजकोंसे कहा, अखतोफेल ने अबशालोम और इस्राएल के वृद्ध लोगोंको इस प्रकार सम्मति दी; लेकिन अमुक-अमुक मैंने सलाह दी।

16 सो अब फुर्ती से दूत भेजकर दाऊद से कह, कि आज रात को अराबा के पार न जाना, परन्तु फुतीं से पार हो जाना, कि राजा और उसके संग की सारी प्रजा न खा ली जाए।

17 योनातान और अहीमास रोगेल के सोते के पास थे;

18 परन्तु एक जवान ने उन्हें देखकर अबशालोम को बताया; परन्‍तु वे दोनों तुरन्‍त निकलकर बहरीम में एक मनुष्‍य के घर में, जिसके आंगन में कुआं या, जाकर वहां उतर गए।

19 तब स्त्री ने ओढ़नी को लेकर कुएं के मुंह पर तान दिया, और उसके ऊपर भूसी का अन्न छिड़क दिया, सो कुछ पता न चला।

20 जब अबशालोम के सेवक घर में उस स्त्री के पास जाकर कहने लगे, अहीमास और योनातन कहां हैं? स्त्री ने उन से कहा, वे जल के घाट के पार हो गए हैं। और उन्हें ढूंढ़ने पर न पाकर यरूशलेम को लौट गए।

21 जब वे चले गए तब वे उस कुएं में से निकलकर दाऊद से कहने लगे, उठकर जल के पार फुर्ती कर; क्योंकि अहीतोफेल ने तेरी हानि की ऐसी सम्मति दी है।

22 तब दाऊद और उसके संग के सब लोग उठे, और यरदन पार हो गए; और बिहान को उजियाला होने तक कोई न बचा जो यरदन के पार न गया हो।

23 और जब अखिटोफेल ने देखा, कि उसकी सम्मति का पालन नहीं हुआ, तब उस ने अपके गदहे पर काठी बान्धी, और उठकर अपके घर और अपके नगर को गया, और अपके घर में सुधार किया, और अपके आप को फांसी लगा ली: और वह मर गया, और मिट्टी दी गई। उसके पिता की कब्र में।

24 दाऊद महनैम में आया; और अबशालोम सब इस्राएली पुरूषोंसमेत यरदन पार हुआ।

25 और अबशालोम ने योआब के स्थान पर अमासा को छावनी पर अधिक्कारनेी ठहराया: और अमासा एक पुरूष का पुत्र या, जिसका नाम यत्रा नाम एक इस्राएली या, जो योआब की माता सरूयाह की बहिन नाहाश की बेटी अबीगैल के पास गया या।

26 सो इस्राएल और अबशालोम ने गिलाद देश में छावनी डाली।

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