द्वितीय शमूएल 18
अबशालोम को एक पेड़ से लटका दिया जाता है और योआब उसे मार डालता है
9 तब अबशालोम दाऊद के जनोंसे मिला; और अबशालोम खच्चर पर चढ़ा हुआ या; तथा; जैसे ही खच्चर एक बड़े बांज वृक्ष की मोटी शाखाओं के नीचे घुसा, उसका सिर उस बांज वृक्ष से लग गया, और वह आकाश और पृथ्वी के बीच में लटका रहा: और खच्चर जो उसके नीचे था, आगे निकल गया।
10 जब किसी मनुष्य ने देखा, तब उस ने योआब को बताया, और कहा, मैं ने अबशालोम को बांज में लटका हुआ देखा है।
11 तब योआब ने बतानेवाले से कहा, जब तू ने उसको देखा, तो उसे वहीं भूमि पर क्योंनहीं मार डाला? और मुझे तुझे चाँदी के दस टुकड़े और एक कटिबन्ध देना होगा।
12 उस मनुष्य ने योआब से कहा, यदि मैं अपके हाथ में चान्दी के हजार टुकड़े तौल भी सकूं, तौभी मैं राजकुमार के विरुद्ध हाथ न बढ़ाऊंगा; क्योंकि हम ने तो सुना है कि राजा ने तुझे और अबीशै और इत्तै को आज्ञा दी यी, और कहा, हे अबशालोम, तुम में से हर एक जवान को छूने से सावधान रहना।
13 यदि मैं ने अपके प्राण को जोखिममें डालकर फूठी बात भी कही हो, तौभी राजा से कुछ न छिपाऊंगा; और आप स्वयं विरोध करेंगे।
14 तब योआब ने कहा, मैं तेरे साय यहां योंही रहने न पाऊंगा। और उस ने तीन लकड़ी ले कर अबशालोम का हृदय बांज वृक्ष के बीच में जीवित रहते हुए छेद डाला।
15 और दस जवानों ने योआब के हथियार लिए हुए उसको घेर लिया। और उन्होंने अबशालोम को मारकर घात किया।
16 तब योआब ने नरसिंगे को फूंका, और प्रजा इस्राएल का पीछा करने से लौट गई, क्योंकि योआब ने प्रजा को रोक रखा या।
17 और उन्होंने अबशालोम को पकड़कर जंगल के एक बड़े गड़हे में डाल दिया, और उसके ऊपर पत्यरों का बहुत बड़ा ढेर लगा दिया; और सब इस्राएली अपके अपके डेरे को भाग गए।
18 और अबशालोम जब तक जीवित या, तब उस ने यह कहकर, कि मेरे नाम का स्मरण कराने के लिथे मेरा कोई पुत्र नहीं, उस ने अपके लिथे एक खम्भा खड़ा किया, जो राजा के ताऊन में है। और उस ने उस स्तम्भ का नाम उसी के नाम पर रखा; इस कारण वह आज तक अबशालोम का स्तम्भ कहलाता है।
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