segunda-feira, 28 de novembro de 2022

द्वितीय शमूएल 18

 द्वितीय शमूएल 18

1 तब दाऊद ने अपके संगियोंकी गिनती ली, और उनके ऊपर सौ सिपाहियोंको नियुक्त किया।

2 और दाऊद ने प्रजा की एक तिहाई योआब के, और एक तिहाई सरूयाह के पुत्र योआब के भाई अबीशै के, और एक तिहाई गती इत्तै के हाथ में करके भेजी; और राजा ने लोगों से कहा, मैं भी तुम्हारे संग चलूंगा।

3 परन्तु लोगों ने कहा, तुम निकलने न पाओगे; और हम में से आधे तो मरेंगे, परन्तु वे हम पर हियाव न रखेंगे, क्योंकि हमारी नाईं तुम दस हजार बटोरोगे; तुम्हारे लिथे यह अच्छा है, कि तुम नगर से बाहर जाकर हमारी सेवा करो।

4 तब दाऊद ने उन से कहा, जो कुछ तुम को अच्छा लगे वही मैं करूंगा। और राजा फाटक के एक ओर खड़ा रहा, और सब लोग सौ, और हजारों की संख्या में निकल आए।

5 और राजा ने योआब, अबीशै, और इत्तै को यह आज्ञा दी, कि मेरे निमित्त उस जवान अबशालोम पर कृपा करना। और जब राजा ने सब प्रधानोंको अबशालोम के विषय में आज्ञा दी तब सब लोगोंने सुनी।

6 तब प्रजा इस्राएल का साम्हना करने को मैदान में निकल गई, और एप्रैम के जंगल में लड़ाई छिड़ गई।

7 और वहां इस्राएली दाऊद के जनोंसे मारे गए, और उसी दिन बीस हजार पुरूष मारे गए।

8 क्योंकि वहां लड़ाई उस सारे देश में फैल गई; और लोगों ने वन को उस दिन तलवार से अधिक सत्यानाश किया जो उस दिन नाश हुई।

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